
मल्टीमीडिया डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप का चुना जाना निःसंदेह एक बड़ी घटना है, जिसका असर आने वाले दिनों में पूरी दुनिया में देखने को मिलेगा। अगर दुनिया की बड़ी महाशक्तियों की बात करें तो रूस, अमेरिका, चीन और भारत आतंकवाद को लेकर अब कोई ठोस कदम उठाते हुए दिख सकते हैं।
मुस्लिम विरोधी माने जाने वाले ट्रंप आतंकवाद और कट्टरपंथ का मुद्दा लेकर चुनाव जीते हैं। रूस पहले ही सीरिया में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट को निशाना बनाता आ रहा है। मगर, अभी तक अमेरिका की तरफ से होने वाले विरोध के कारण आतंकी संगठनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है।
पुतिन ट्रंप को अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में देखना चाहते थे और अब ऐसा हो भी गया है। ऐसे में उम्मीद है कि अमेरिका आतंक के खिलाफ कार्रवाई में रूस के रास्ते में रोड़ा नहीं अटकाएगा। साथ ही हो सकता है कि वह इस मामले में रूस के साथ खड़ा भी दिखे।
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इसकी बानगी ट्रंप के उस बयान से मिलती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि रूस के विरोध में बने यूरोपीय देशों के सैन्य संगठन नाटो के सदस्य अमेरिका की बात नहीं मानते हैं, तो वह नाटो को सपोर्ट करना बंद कर देंगे।
ट्रंप कई मामलों में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर चुके हैं। उनकी विचारधारा भी मोदी से मिलती है और मोदी के पुतिन के नेतृत्व वाले रूस के साथ अच्छे संबंध हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव के नतीजे आने से पहले ही भारत ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद को लेकर राजनीति कर रहा है। इसे लेकर उसने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
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उधर, चीन भी गाहे-बगाहे अपने यहां उईगर मुस्लिमों के दंगों के कारण अक्सर परेशानी का सामना करता रहता है। ऐसे में इन बड़ी महाशक्तियों में एक जैसी सोच वाले नेताओं का प्रमुख पदों पर काबिज होना संकेत दे रहा है कि आने वाले समय में दुनिया में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।