
बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप की जीत कई देशों के गले नहीं उतर रही है। चीन तो इससे इतना बौखला गया है कि उसने ट्रंप की जीत के बाद लोकतंत्र की उपयोगिता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बुधवार को कहा कि यदि लोगों के पास लोकतंत्र हो, तो यही होता है। ट्रंप की जीत दिखाती है कि अमेरिका का लोकतंत्र कैसा संकट लाया है। ट्रंप के चुनाव अभियान और सत्ता के शीर्ष तक उनकी पहुंच बता रही है कि अधिकांश अमेरिकियों ने देश के वर्तमान राजनीतिक और अमीर वर्ग के खिलाफ विद्रोही रुख अपनाया है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रचार अभियान के दौरान चीनी मीडिया और सरकार के समर्थन वाले टिप्पणीकारों ने ट्रंप का समर्थन किया था। कहा गया था कि साउथ चाइना सी सहित चीन की विदेश नीति के अन्य पहलुओं पर हिलरी की तुलना में ट्रंप ज्यादा बेहतर होंगे।
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मगर, अब चीनी मीडिया ट्रंप के विरोध पर उतर आई है। दरअसल, प्रचार अभियान में ट्रंप अमेरिकियों को खोई हुई नौकरियां वापस दिलाने की बात करते रहे हैं। वह चीन और भारत का हवाला देते हुए कह चुके हैं कि वे सात-आठ फीसद की दर से वृद्धि कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं।
सस्ते एशियाई लेबर की समस्या से निपटने के लिए ट्रंप टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में यदि अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर जोर दिया जाता है, तो उसका सीधा असर चीन पर पड़ेगा। गौरतलब है कि बीते 15 सालों में अमेरिका में इस सेक्टर में 50 लाख नौकरियां कम हुई हैं।
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अमेरिका में नौकरियों के कम होने का सकारात्मक प्रभाव चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जोरदार वृद्धि के रूप में देखने को मिला। अब ट्रंप के राष्ट्रपति चुन लिए जाने के बाद में चीन इस बात से भी डरा हुआ है कि यदि ट्रंप ने जो कहा है, वह कर दिया, तो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए यह अच्छा नहीं होगा।