
ब्रिटेन। नीदरलैंड में एक दवा-परीक्षण के तहत गर्भवती महिलाओं को सिल्डेनाफिल दी गई। इस दवा को वियाग्रा नाम से भी जाना जाता है और इसके दिए जाने के बाद 11 गर्भस्थ शिशुओं की मौत हो गई। इसके बाद पिछले हफ्ते अधिकारियों ने यह परीक्षण रोक दिया। यह परीक्षण गर्भस्थ शिशुओं का विकास तेज करने के मकसद से किया जा रहा था।
एक मीडिया रिपोर्ट में मंगलवार को यह जानकारी दी गई। बताया जा रहा है कि वियाग्रा के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ गया, जिससे बच्चों तक काफी कम ऑक्सीजन पहुंच सकी। एम्सटर्डम यूएमसी के प्रवक्ता ने कहा कि ट्रायल सही तरह से किया गया है, लेकिन एक बाहरी जांच बैठाई जाएगी। कम वजन के पैदा होने वाले बच्चों के जन्म को रोकने के लिए इस दवा को दिया गया था।
नीदरलैंड के 10 अस्पतालों में किए गए इस परीक्षण में उन महिलाओं को शामिल किया गया, जिनके गर्भ में शिशुओं का विकास अपेक्षाकृत धीमा था। उन महिलाओं को वियाग्रा की खुराक दी गई। इससे पहले चूहों पर किए गए शोध में पता चला था कि वियाग्रा रक्त वाहिकाओं को फैलाती है। मगर, इस दवा का परिणाम खराब निकाला और बच्चों की मौत हो गई।
महिलाओं को वियाग्रा की खुराक देते समय माना गया था कि इससे गर्भनाल में रक्त का प्रवाह बढ़ेगा, जिससे गर्भस्थ शिशुओं के विकास में तेजी आएगी। जब इस परीक्षण की देखरेख करने वाली स्वतंत्र समिति ने पाया कि परीक्षण में शामिल महिलाओं से पैदा होने वाले शिशुओं में से ज्यादातर को फेफड़ों की समस्या है और 11 शिशुओं की मौत हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने दवा के ट्रायल को रोक दिया।
यह परीक्षण साल 2015 में शुरू हुआ था और इसे साल 2020 तक चलना था। इस परीक्षण में 350 महिलाओं को शामिल किया गया था, जिनमें से 93 को वियाग्रा की खुराक दी गई। एम्सटर्डम यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के नेतृत्व में किए गए परीक्षण में पाया गया कि वियाग्रा लेने वाली महिलाओं के 11 शिशु मर गए, जबकि 17 शिशुओं में फेफड़ों की समस्या हुई।
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