
डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को निशाना बनाए जाने के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। हाल ही में दो अलग-अलग क्षेत्रों से सामने आए हिंसक मामलों ने अल्पसंख्यकों की जान-माल की हिफाजत को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। पहली सनसनीखेज वारदात मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला से सामने आई है, जहां पेशे से नाई रबेंद्र ऋषि की धारदार हथियार से हमला कर जान ले ली गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सद्दाम नामक युवक अक्सर रबेंद्र के सैलून पर मुफ्त में बाल कटवाने आता था और नशे की लत पूरी करने के लिए उनसे लगातार अवैध वसूली का दबाव बनाता था। मंगलवार शाम रबेंद्र द्वारा मुफ्त काम करने से इनकार करने पर आरोपी आपा खो बैठा और उसने नुकीले हथियार से उन पर हमला बोल दिया। जान बचाने के लिए रबेंद्र भागते हुए पास की एक दुकान और फिर एक मकान के अहाते में पहुंचे, मगर हमलावर ने पीछा कर उन्हें दबोच लिया और लगातार कई प्रहार किए।
गंभीर चोटों और ज्यादा खून बहने के चलते उन्होंने वहीं दम तोड़ दिया। मृतक की पत्नी सुचित्रा के अनुसार, आरोपी लंबे समय से उनके परिवार को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। दुर्गा पूजा के समय भी उसने रबेंद्र को जान से मारने की खुली चेतावनी दी थी। घटना के बाद हरकत में आई स्थानीय पुलिस ने आरोपी सद्दाम को हिरासत में ले लिया है और कानूनी कार्रवाई जारी है।
दूसरी घटना रंगपुर जिले के पीरगंज उपजिला अंतर्गत चक्र करीमपुर गांव की है। यहां सोमवार देर रात एक सोशल मीडिया टिप्पणी को मुद्दा बनाकर उपद्रवियों की भीड़ ने तीन हिंदू परिवारों पर धावा बोल दिया। यह निशाना तीन सगे भाइयों—बिशु चंद्र महंता, जगदीश चंद्र महंता और दिनेश चंद्र महंता के आवासों को बनाया गया। हमलावरों ने घरों के मुख्य द्वार, दीवारें, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और फर्नीचर बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिए।
उत्पात मचाने के साथ ही उपद्रवी नकदी, कीमती सामान और पालतू बकरियां तक लूटकर फरार हो गए। पीड़ित महिला आरती रानी ने बताया कि उन्होंने उपद्रवियों के सामने हाथ जोड़कर रहम की अपील की, लेकिन जान से मारने की धमकियां मिलने के कारण परिवार को छिपकर अपनी जान बचानी पड़ी।