
डिजिटल डेस्क। ग्लोबल लेवल पर आज भारतीय न केवल सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय बनाते हैं, बल्कि दुनिया भर के अलग-अलग महाद्वीपों में अपनी विशिष्ट पहचान भी दर्ज करा चुके हैं। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 3.5 करोड़ एनआरआई (NRI) और भारतीय मूल के लोग भारत के बाहर निवास कर रहे हैं।
बेहतर करियर, शिक्षा, व्यापार और आधुनिक जीवन शैली की तलाश में गए इन प्रवासियों ने विदेशी अर्थव्यवस्थाओं को गति देने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भी मजबूत बनाए रखा है। आइए जानते हैं दुनिया के उन 5 प्रमुख देशों के बारे में, जहां भारतीयों की आबादी सबसे ज्यादा है:
भारतीय प्रवासियों की सबसे अधिक संख्या संयुक्त राज्य अमेरिका में पाई जाती है, जहां लगभग 54 लाख भारतीय निवास करते हैं। इनमें पेशेवर, छात्र और उनके परिवार शामिल हैं। आईटी, मेडिकल, शिक्षा और बिजनेस जैसे क्षेत्रों में भारतीय-अमेरिकी समुदाय का वर्चस्व है, और इसे अमेरिका के सबसे समृद्ध और सफल समुदायों में गिना जाता है। न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया, न्यू जर्सी और टेक्सास जैसे राज्यों में इनकी सबसे बड़ी आबादी मौजूद है।
प्रवासी भारतीयों के लिए यूएई दूसरा सबसे पसंदीदा ठिकाना है। यहां लगभग 36 लाख भारतीय रहते हैं, जो यूएई की कुल जनसंख्या का करीब एक-तिहाई हिस्सा हैं। इस वर्ग में कुशल पेशेवरों और बड़े उद्यमियों से लेकर निर्माण क्षेत्र के श्रमिक तक शामिल हैं। यूएई की अर्थव्यवस्था, समाज और संस्कृति पर भारतीय प्रभाव काफी गहरा है।
दक्षिण-पूर्व एशिया में मलेशिया ऐसा देश है, जहां प्रवासियों की तीसरी सबसे बड़ी भारतीय आबादी (लगभग 29 लाख) बसती है। इनमें से अधिकांश लोग तमिल मूल के हैं, जिनके पूर्वज ब्रिटिश शासनकाल के दौरान यहाँ आए थे। वर्तमान में मलेशियाई-भारतीय वर्ग कानून, चिकित्सा, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में प्रमुखता से सक्रिय है।
कनाडा में प्रवासियों की संख्या करीब 28 से 29 लाख के बीच है। वर्ष 1967 में इमिग्रेशन नियमों में बदलाव के बाद से यहाँ भारतीय प्रवासियों का आगमन तेजी से बढ़ा। कनाडा की राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था में भारतीय समुदाय, विशेष रूप से पंजाब से आए लोगों का काफी प्रभाव है। ब्रिटिश कोलंबिया और ओंटारियो में इनकी सर्वाधिक सघनता है।
सऊदी अरब में करीब 25 लाख भारतीय नागरिक निवास करते हैं। 1970 के दशक के तेल और बुनियादी ढांचे के विकास के दौर में भारतीयों का यहाँ जाना शुरू हुआ था। आज यह समुदाय सऊदी अरब के निर्माण, स्वास्थ्य और रिटेल सेक्टर में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इसके साथ ही, यहाँ से भारत को हर साल भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा (रेमिटेंस) प्राप्त होती है।
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