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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 08, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

International Literacy Day 2021: जानिए क्यों मनाया जाता है विश्व साक्षरता दिवस, ऐसे हुई थी शुरुआत

साक्षरता एक अधिकार है और एक साक्षर व्यक्ति बेहतर समाज के निर्माण में मदद करता है। साक्षरता दिवस इन्हीं बातों का महत्व समझाता है।

By Sandeep ChoureyEdited By: Sandeep Chourey
Publish Date: Wed, 08 Sep 2021 10:20:34 AM (IST)Updated Date: Wed, 08 Sep 2021 10:29:05 AM (IST)
International Literacy Day 2021: जानिए क्यों मनाया जाता है विश्व साक्षरता दिवस, ऐसे हुई थी शुरुआत
International Literacy Day 2021 डिजिटल साक्षरता के प्रति समर्पित है।

International Literacy Day 2021: दुनियाभर में 8 सितंबर का दिन विश्व साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य व्यक्तियों, समुदायों और समाजों के लिए साक्षरता के महत्व को समझाना और ज्यादा साक्षर समाजों के लिए लगातार प्रयास करना है। कोरोना महामारी के चलते शिक्षा बहुत ही खराब तरीके से प्रभावित हुई है और ऐसे में बीच विश्व साक्षरता दिवस का महत्व और बढ़ गया है। यह दिन साक्षरता की अहमियत समझाता है और उसके महत्व को चिन्हित करने के लिए मनाया जाता है।

विश्व साक्षरता दिवस यह याद दिलाता है कि साक्षरता एक अधिकार है। साल 1966 में यूनाइटेड नेशन्स एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (UNESCO) ने 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाए जाने की घोषणा की थी।

क्या है इस साल की थीम

विश्व साक्षरता दिवस के लिए हर साल की थीम रखी जाती है, जिस पर जोर देते हुए सभी देश यह दिन मनाते हैं और साक्षरता बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं। इस साल की थीम "ह्यूमन सेंटर्ड रिकवरी के लिए साक्षरता: डिजिटल डिवाइड को कम करना" रखी गई है। इस साल की थीम डिजिटल साक्षरता के बारे में लोगों में अधिक जागरूकता पैदा करने के लिए समर्पित है। कोरोनाकाल में सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना जरूरी है। ऐसे में डिजिटल साक्षरता के बिना दुनिया से जुड़े रहना और आगे की शिक्षा हासिल करना असंभव है।


साक्षरता दिवस का इतिहास

7 नवम्बर 1965 को पहली बार यूनेस्को ने अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का फैसला किया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने के लिए एक दिन निर्धारित करने का फैसला किया गया और 8 सितंबर का दिन इसके लिए चुना गया। इसके बाद से ही हर साल 8 सितम्बर को विश्व साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यूनेस्को ने यह फैसला लेने के बाद साल 1966 से ही 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाने की शुरुआत की थी।

विश्व साक्षरता दिवस का महत्व

विश्व साक्षरता दिवस लोगों को साक्षर होने के लिए जागरुक करता है। एक साक्षर व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरुक होता है और एक बेहतर समाज का निर्माण करता है। साक्षरता के जरिए न सिर्फ लोगों के जीवन जीने का तरीका बेहतर होता है, बल्कि इसके जरिए गरीबी को दूर किया जा सकता है और जनसंख्या को नियंत्रित किया जा सकता है। बेहतर साक्षरता दर बाल मृत्यु दर को कम में भी मदद करती है। यूनेस्को इस दिन लोगों को जागरूक करने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में कई कार्यक्रम आयोजित करता है।

भारत में साक्षरता दर

2011 में हुई जनगणना के अनुसार भारत की कुल आबादी के 74.04 प्रतिशत साक्षर हैं। साल 2001 में यह संख्या 65.2 प्रतिशत थी। इन 10 सालों में भारत की साक्षरता दर 9.2 प्रतिशत बढ़ी थी। यूनेस्को के अनुसार भारत की पूरी आबादी को साक्षर करने में 50 साल लगेंगे। इस हिसाब से भारत 2060 तक पूरी तरह से साक्षर होगा। हालांकि पिछले 10 सालों में यह तस्वीर काफी हद तक बदली है और डिजिटल क्रांति आने से साक्षरता दर भी बढ़ी है।