
ब्रिटेन। इराक और सीरिया में सक्रिय आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने अपना प्लान 2020 तैयार किया है। इसके तहत आतंकी संगठन आईएस यूरोप, चीन, भारत और उत्तरी अफ्रीका के कुछ इलाकों तक फैलना चाहता है। इसके लिए उसने अपने कब्जे वाले देशों का एक नया मैप भी जारी किया है।
बीबीसी के एक पत्रकार एंड्र्यू हॉस्केन ने नई किताब इम्पायर ऑफ फियर : इनसाइड द इस्लामिक स्टेट लिखी है। इस किताब में इस्लामिक स्टेट के उस मैप को प्रकाशित किया गया है, जिसमें उसने आने वाले पांच सालों में कब्जा करने की योजना बनाई है।
शरिया कानून के तहत शासित होने वाले राज्य खलीफा में स्पेन से लेकर पूर्व में चीन के पश्िचमी सीमा तक के इलाके को शामिल किया गया है। आईएस के पास करीब 50 हजार लड़ाके हैं और उसके पास नगदी और संपत्ित करीब दो अरब डॉलर की है।
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उसे बड़ी मात्रा में रकम इराक व सीरिया में उसके कब्जे वाले ऑयल और गैस फील्ड्स से मिलती है। आईएस के आतंकियों ने अपनी बर्बरता से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। आतंकियों ने जून में छुटि्टयां बिताने ट्यूनिशिया में गए 38 लोगों की हत्या कर दी थी।
हॉस्केन कहते हैं कि वे पूरी दुनिया को इस्लामिक वर्ल्ड के रूप में देखना चाहते हैं। अपना खलीफा बनाने के बाद वह पूरी दुनिया को इसमें बदलना चाहते हैं। वे पूरी दुनिया में अपना शासन चाहते हैं। हॉस्केन बताते हैं कि अमेरिका और रूस सहित दुनिया के करीब 60 देश उनके खिलाफ हैं।
वह बताते हैं कि लोगों को महसूस होता होगा कि इस्लामिक स्टेट खलीफा का निर्माण नहीं करना चाहता है और वह शांति से रहेगा। वे हम लोगों को भी अपने शासन के अधीन देखना चाहते हैं और अपनी विचारधार हमारे ऊपर लादना चाहते हैं।
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आईएस के आतंकियों ने इराक और सीरिया को अस्थिर कर दिया है और वे अब सऊदी अरब व लीबिया को अस्थिर करना चाहते हैं। हाल ही में उन्होंने ट्यूनीशिया के मुख्य उद्योग पर्यटन को करीब-करीब बर्बाद ही कर दिया था।
इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि आईएस बायोलॉजिकल या केमिकल हथियार विकसित कर सकता है। यदि उन्होंने नर संहार के हथियार विकसित कर लिए, तो वे उसका उपयोग करेंगे। होस्केन ने अपनी किताब में बताया कि है आईएस की स्थापना करने वाले अबु मुसाब अल-जरकावी ने 1996 में सात चरणों वाले एक प्रोग्राम के बारे में बताया था, जिससे मुस्लिम 2020 तक दुनिया को जीत लेंगे।
वर्ष 2010-2011 में करीब 80 फीसद उनके नेता या तो पकड़ लिए गए थे, या मार दिए गए थे। चंद जिहादी ही बचे थे, जिन्हें खत्म नहीं किया गया था और कैंसर की तरह वे फिर से वापस आ गए। लंबे हवाई हमलों के बाद भी आईएस के बर्बर हत्याओं को रोक पाने में असफल रहने के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन पर दबाव है कि वह इराक और सीरिया में सेना भेजें।