
वॉशिंगटन। अमेरिका में जैसे ही चुनावों के नतीजे घोषित हुए और डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने की खबरें मिलीं, हजारों की तादात में लोग रात में ही सड़कों पर उतर आए। वहां अभी भी एक रास्ता है, जिससे हिलेरी क्लिंटन के राष्ट्रपति बनने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
हालांकि, इस बात की संभावना काफी कम है, लेकिन पूर्व में भी ऐसा हो चुका है। दरअसल, जब राष्ट्रपति पद के लिए वोट डाले जाते हैं, तो वास्तव में मतदाता इलेक्टर्स के लिए मतदान करते हैं। नागरिकों के द्वारा चुने गए उम्मीदवार अपने राज्य में जीत के लिए एक इलेक्टोरल कॉलेज वोट डालती है।
सवाल- इलेक्टोरल कॉलेज वोटिंग क्या है?
जवाब- अमेरिका में राष्ट्रपति के चुनाव में जनता की सीधी भागीदारी नहीं होती। हर प्रांत में संसद की सीटों के बराबर इलेक्टोरल कॉलेज की सीट होती है। जनता इसके सदस्य का चुनाव करती है। 'विनर टेक्स ऑल' की व्यवस्था के तहत, जो उम्मीदवार जिस प्रांत में ज्यादा वोट पाता है, वहां की सभी इलेक्टोरल सीट उसके खाते में दर्ज की जाती है। बुधवार को ट्रंप और हिलेरी को मिली सीटों की गणना इसी आधार पर है। ये सभी सदस्य अब 19 दिसंबर को राष्ट्रपति चुनने के लिए मतदान करेंगे।
सवाल- क्या 19 दिसंबर के मतदान के नतीजे आज से अलग हो सकते हैं?
जवाब- आमतौर पर ऐसा नहीं होता। लेकिन, 2000 में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश पॉपुलर वोटिंग में हारने के बावजूद इलेक्टोरल कॉलेज वोटिंग में जीते थे। उनसे पहले 1888 में बेंजामिन हेरिसन के साथ भी ऐसा हुआ था। चुनाव अभियान के दौरान कई रिपब्लिकन ट्रंप का सार्वजनिक तौर पर विरोध कर चुके हैं। इलेक्टोरल कॉलेज के लिए चुने गए कुछ रिपब्लिकन सदस्य मतदान के दौरान अपने पुराने स्टैंड पर कायम रहे, तो ट्रंप की हार भी मुमकिन है।
सवाल : आखिर कब अंतिम माना जाएगा अमेरिकी राष्ट्रपति का निर्वाचन?
जवाब- 6 जनवरी को अमेरिकी संसद (कांग्रेस) का संयुक्त सत्र होगा। इसी दिन इलेक्टोरल कॉलेज के वोटों की गिनती होगी। वही नतीजे आधिकारिक माने जाएंगे और 20 जनवरी को नया राष्ट्रपति शपथ लेगा।