
डिजिटल डेस्क। न्यूयॉर्क सिटी के नवनियुक्त मेयर जोहरान ममदानी ने जेल में बंद छात्र नेता उमर खालिद के नाम एक भावनात्मक पत्र लिखा है। यह पत्र उन्होंने उमर खालिद के माता-पिता को सौंपा, ताकि वह उनके बेटे तक पहुंच सके।
चिट्ठी में ममदानी ने लिखा है कि कठिन परिस्थितियों में उन्हें अक्सर उमर के विचार याद आते हैं और यह भी कि कड़वाहट को खुद पर हावी नहीं होने देना कितना जरूरी है। उन्होंने यह भी लिखा कि उमर के माता-पिता से मिलकर उन्हें बेहद खुशी हुई और सभी लोग उमर के बारे में लगातार सोच रहे हैं।
पहले एशियाई अमेरिकी और मुस्लिम मेयर
34 वर्षीय जोहरान ममदानी पिछले वर्ष न्यूयॉर्क शहर के पहले एशियाई अमेरिकी और मुस्लिम मेयर बने थे। दिसंबर 2025 में अमेरिका यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात उमर खालिद के माता-पिता से हुई थी, उसी समय उन्होंने यह संदेश लिखकर उन्हें सौंपा था।
गुरुवार 1 जनवरी को, जिस दिन जोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद की शपथ ली, उसी दिन उमर खालिद की साथी बूनोज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस पत्र की तस्वीर साझा की।
हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में लाहिड़ी ने बताया कि उमर खालिद के माता-पिता साहिबा खानम और सैयद कासिम रसूल इलियास अपनी सबसे छोटी बेटी की शादी से पहले अमेरिका गए थे। वे वहां अपनी उस बेटी से मिलने गए थे, जो भारत आकर शादी में शामिल नहीं हो सकी थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात जोहरान ममदानी से हुई और उसी समय यह पत्र लिखा गया।
लंबी प्री-ट्रायल हिरासत पर चिंता
इस बीच, अमेरिका के कांग्रेस सदस्य जेम्स पी. मैकगवर्न ने भी इस मामले को लेकर भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को पत्र लिखा है। उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में आरोपित लोगों की लंबी प्री-ट्रायल हिरासत पर चिंता जताई है।
मैकगवर्न ने अपने पत्र में लिखा कि हिंसा भड़काने के आरोपों के तहत उमर खालिद और अन्य मुस्लिम मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने जांच और कानूनी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। स्वतंत्र जांचों में उमर खालिद को आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय संधि (ICCPR) के पक्षकार देश के रूप में भारत को समयबद्ध सुनवाई और दोष सिद्ध होने तक निर्दोष माने जाने के सिद्धांत का सम्मान करना चाहिए।