
इस्लामाबाद। दुनिया के छठवें बड़े देश पाकिस्तान में 25 जुलाई को चुनाव होने जा रहे हैं। पाकिस्तान के चुनाव आयोग के अनुसार, करीब 10 करोड़ 59 लाख लोग इस चुनाव में मतदान करेंगे। मगर, इस चुनाव में भारत की भी दिलचस्पी है। दरअसल, पाकिस्तान में किसकी सरकार बनती है, इसका काफी असर भारत और दक्षिण एशिया की राजनीति पर होगा। जानते हैं इस चुनाव के बारे में और भारत की चिंता क्या है...
20 करोड़ की आबादी वाले इस देश में वैसे तो मुख्य मुकाबला नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) और क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के साथ होना है। पिछले चुनाव में नवाज शरीफ की पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला था। मगर, भ्रष्टाचार के आरोप के बाद उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी थी। यह चुनाव पीएमएल (एन) का भविष्य तय करेगा, जिसकी कमान नवाज के भाई शाहबाज शरीफ संभाल रहे हैं, जो कुछ हद तक मोदी की शैली में काम करने के लिए जाने जाते हैं। शाहबाज शरीफ भारत से शांति वर्ता की बात कई बार उठा चुके हैं।
वहीं, इमरान खान की पार्टी पीटीआई के बारे में कहा जाता है कि उसे देश की सेना का समर्थन हासिल है। इमरान खान ने वादा किया है कि वह भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकेंगे और सरकार में सुधार के जरिये नया पाकिस्तान बनाएंगे। अगर, पीएमएल (एन) के गढ़ माने जाने वाले पंजाब में पीटीआई जीत हासिल करती है, तो देश में इमरान खान की सरकार बन सकती है। मगर, उनकी पार्टी कहीं न कहीं सेना के एजेंडे के तहत ही अधिक चलेगी।
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वहीं, तीसरे मोर्चे पर पीपुल्स पार्टी ऑफ पाकिस्तान भी ताल ठोंक रही है, जिसका नेतृत्व पूर्व राष्ट्रपति रहे आसिफ अली जरदारी और पूर्व प्रधानमंत्री मरहूम बेनजीर भुट्टो के 29 वर्षीट बेटे बिलावल जरदारी भुट्टो कर रहे हैं। यह पाकिस्तान की एक मात्र वामपंथ की झुकाव वाली पार्टी है। साल 1967 में गठन के बाद से अब तक कई बार सरकार में रह चुकी है।
चिंता हाफिज की पार्टी की है
पाकिस्तान के चुनाव में भारत की मुख्य चिंता मुंबई हमले के मास्टर माइंड रहे हाफिज सईद की पार्टी है। यदि उसकी पार्टी सरकार में शामिल होती है, तो इसका सीधा मतलब होगा कि पाकिस्तान की सरकार आतंकवाद को बढ़ावा देगी। तीन जुलाई को हाफिज सईद ने पाकिस्तानी नेताओं को अमेरिका और भारत के हाथों की कठपुतली कहा था। अगर इस चुनाव में उसे सफलता मिलती है तो इससे पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की राजनीति भी बुरी तरह प्रभावित होगी, जिससे भारत भी अछूता नहीं रहेगा।
हालांकि, यूएन के प्रतिबंधों की वजह से हाफिज सईद खुद चुनाव नहीं लड़ रहा है। दरअसल, आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता के चलते हाफिज सईद पर अमेरिका ने एक करोड़ डॉलर का इनाम रखा है। मगर, हाफिज सईद ने अपने बेटे और दामाद को मैदान में उतारा है। हाफिज सईद का बेटा हाफिज ताल्हा सईद एनए 91 सीट से चुनाव लड़ रहा है। वहीं, उसका दामाद हाफिल खालिद वलीद एनए 133 सीट से अल्ला-हू-अकबर तहरीक के चुनाव चिन्ह कुर्सी से चुनाव लड़ रहा है। आतंक का खूनी खेल खेलने वाले हाफिज की मंशा पाकिस्तान को 'इस्लाम का गढ़' बनाने की है। इसके लिए वह पाकिस्तान की राजनीति में सीधे हस्तक्षेप की तैयारी में है।
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