
लंदन। मैनचेस्टर विश्वविद्यालय में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि मौसम की स्थिति और शरीर में होने वाले दर्द के स्तर में परिवर्तन के बीच संबंध होता है। शोधकर्ताओं ने अर्थराइटिस, पीठ के दर्द और माइग्रेन के पुराने दर्द पीड़ित 9,000 लोगों पर अध्ययन किया।
इन लोगों ने अपने लक्षण एक स्मार्टफोन एप्लिकेशन के माध्यम से हर दिन मुहैया कराए। हर घंटे मौसम की स्थिति की निगरानी करके ऐप ने वैज्ञानिकों को यह पता करने में मदद की कि मौसम में बदलाव के सापेक्ष लोग कितना दर्द महसूस कर रहे हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि इस वर्ष फरवरी से जून के बीच में तीन शहरों लीड्स, नॉर्विच और लंदन में 100 प्रतिभागियों ने कम दर्द का अनुभव किया। यह उस मौसम की बात है, जब धूप के दिनों में वृद्धि हुई है।
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जून में जब बारिश का मौसम आया और धूप निकलने के घंटों में कमी हुई, तो एक बार फिर से लोगों के दर्द का स्तर बढ़ गया। 18 महीने का रिसर्च प्रोजेक्ट 'क्लाउडी विथ ए चांस ऑफ पेन' अभी आधा ही पूरा हुआ है। मगर, इसके प्रारंभिक निष्कर्ष इस सप्ताह स्वानसी में होने वाले ब्रिटिश साइंस फेस्टिवल में रिपोर्ट किए जाएंगे।
सैलफोर्ड रॉयल अस्पताल में गठिया मरीजों का इलाज करने वाले प्रोफेसर विल डिक्सन इक रिसर्च को लीड कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम लंबे समय के इस बारे में सुनते आ रहे हैं कि पुराने दर्द से पीड़ित लोग खराब मौसम में अधिक दर्द का अनुभव करते हैं।
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उन्होंने बताया कि उनके कई मरीज बताते हैं कि वे कैसा दर्द महसूस कर रहे हैं, उसके आधार पर वे मौसम की भविष्यवाणी कर सकते हैं। मगर, अजीब बात है कि इस विषय पर कोई रिसर्च नहीं की गई है।