
मल्टीमीडिया डेस्क। 14 दिसंबर के ही दिन 2003 में इराक के अपदस्थ राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को अमेरिकी सेना ने अपने कब्जे में ले लिया था। अमेरिका ने कई देशों के सहयोग से इराक पर हमला कर सद्दाम हुसैन को न केवल पकड़ा बल्कि उसे फांसी पर लटका दिया। भारत के इराक से रिश्ते सदियों पुराने हैं। तब से जब इराक नहीं मेसोपोटामिया साम्राज्य था। भारत की आजादी को मान्यता देने वाले शुरुआती देशों में इराक भी शामिल था। भारत इराक की बाथ पार्टी वाली सरकार को मान्यता देने वाले पहले देशों में। 1965 के भारत पाक युद्ध में इराक ने किसी का पक्ष नहीं
लिया। 1971 की भारत-पाक लड़ाई में इराक ने बाकी इरब देशों के साथ पाकिस्तान का पक्ष लिया। 1980 के दशक में भारत ने इराकी वायुसैनिकों को ट्रेनिंग दी। इंदिरा गांधी के समय भारत दुनिया में सबसे ताकतवर था।
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इंदिरा गांधी की 1975 इराक यात्रा पर मेजबान सद्दाम हुसैन ने उनका सूटकेस उठाया था। जब राएबरेली लोकसभा चुनाव में वे हार गयीं तो इंदिरा गांधी को बगदाद में स्थाई आवास की पेशकश सद्दाम ने की थी। पोखरण द्वितीय पर अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार को सद्दाम ने बधाई दी थी। जबकि कई राष्ट्रों ने आर्थिक प्रतिबन्ध लगाए थे। सद्दाम के नेतृत्व वाली बाथ सोशलिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशनों में शिरकत करते रहे।
यह तक कहा जाता था कि सद्दाम हुसैन के दोनों बेटों उदय व कुशय का नामकरण इंदिरा गांधी ने ही किया था।