
डिजिटल डेस्क। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की को बड़ा झटका लगा है, जहां उनके करीबी एंड्री यरमक के घर एंटी-करप्शन डिपार्टमेंट की रेड पड़ी, जिसकी वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई 100 मिलियन डॉलर के किकबैक घोटाले से जुड़े मामले के तहत की गई है।
यरमक को यूक्रेन का दूसरा सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता था। रूस के आक्रमण के दौरान वे कूटनीति और शांति वार्ताओं का प्रमुख चेहरा रहे। उन्होंने विदेशों के साथ संपर्क बनाए, कीव आने वाले वैश्विक नेताओं की मेजबानी की और राष्ट्रपति के साथ अंतरराष्ट्रीय दौरों पर जाकर सैन्य और राजनयिक सहयोग जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यरमक का जन्म कीव में हुआ। उन्होंने टारस शेवचेंको नेशनल यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय निजी कानून में शिक्षा ली और 1997 में अपनी लॉ फर्म स्थापित की। राजनीति में प्रवेश उन्होंने पार्टी ऑफ रीज़न्स के सांसद और पूर्व ओलंपिक पहलवान एल्ब्रस टेडेयेव के कानूनी सलाहकार के रूप में किया। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया क्षेत्र में भी कदम रखा और 2012 में गार्नेट मीडिया ग्रुप की स्थापना की, जो यूक्रेनी फिल्मों और टीवी प्रोजेक्ट्स पर काम करता था।
2011 में उनकी पहली मुलाकात ज़ेलेंस्की से हुई, उस समय वे इंटर चैनल के जनरल प्रोड्यूसर थे। ज़ेलेंस्की के राष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें विदेश नीति का सहायक बनाया गया। उन्होंने रूस के साथ कैदियों की अदला-बदली और अमेरिका के साथ बातचीत का जिम्मा संभाला। 2020 में वे राष्ट्रपति कार्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्य बने।
2022 में रूस के आक्रमण के बाद वे मानवीय सहायता समन्वय के प्रमुख भी बने। सैन्य शैली की पोशाक पहनने के कारण उन्हें "ग्रीन कार्ड नल" कहा जाने लगा और उन्हें लगभग सह-राष्ट्रपति जैसा प्रभावशाली माना जाता था—यूक्रेन का सबसे शक्तिशाली अनिर्वाचित व्यक्ति।
हाल ही में नेशनल एंटीकरप्शन ब्यूरो ने ऊर्जा क्षेत्र के घोटाले की जांच के सिलसिले में उनके घर की तलाशी ली, जिसके बाद उनका इस्तीफा आया। दो मंत्रियों के इस्तीफे के बाद यह तीसरा बड़ा झटका है। यरमक का जाना यूक्रेन की राजनीति और प्रशासन पर गंभीर असर डाल सकता है, क्योंकि वे युद्धकाल में आंतरिक अनुशासन और रणनीतिक संचालन के प्रमुख प्रवर्तक थे।