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पाकिस्तान में इंटरनेट पर दरिंदगी! 15 लाख बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग के शिकार

डिजिटल दुनिया के विस्तार के साथ ही बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। UNICEF की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान में हर साल ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 03:58:23 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 03:58:23 PM (IST)
पाकिस्तान में इंटरनेट पर दरिंदगी! 15 लाख बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग के शिकार
15 लाख पाकिस्तानी बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण का शिकार। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

HighLights

  1. पाकिस्तान में सालाना 15 लाख बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण के शिकार
  2. 85% मामलों में जान-पहचान वाले ही निकले बच्चों के शोषक
  3. बदनामी के डर से 71% पीड़ितों ने किसी से साझा नहीं किया दर्द

डिजिटल डेस्क। डिजिटल दुनिया के विस्तार के साथ ही बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान में हर साल औसतन 15 लाख बच्चे इंटरनेट के जरिए यौन शोषण का शिकार बन रहे हैं। ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपराधियों द्वारा बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है।

इसी तरह के एक मामले में 17 वर्षीय नाबालिग पीड़िता (बदला हुआ नाम- जारा शाह) को एक अजनबी ने ऑनलाइन गेम खेलते समय अपनी बातों में फंसाया। पीड़िता के अनुसार, गेमिंग के दौरान दोस्ती करने के बाद आरोपी ने उनसे व्यक्तिगत तस्वीरें मांगीं। इंकार करने पर आरोपी ने परिवार को सूचना देने और ऑनलाइन ढूंढ निकालने की धमकी देकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। इस मानसिक दबाव के कारण वह गहरे खौफ में जीने को मजबूर है।


85 फीसदी मामलों में जान-पहचान वाले ही निकले अपराधी

यूनिसेफ द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट के मुख्य लेखक डोनियल कार्डफेल्ट के अनुसार, लगभग 85 प्रतिशत मामलों में शोषण करने वाले व्यक्ति पीड़ितों के पूर्व परिचित ही निकलते हैं। अपराधी अक्सर ऑनलाइन गेमिंग, सामान्य बातचीत, उपहार देने या पैसे व झूठे प्रेम का झांसा देकर बच्चों का विश्वास जीतते हैं। सोशल मीडिया पर मौजूद व्यक्तिगत जानकारियों का इस्तेमाल कर बच्चों को जाल में फंसाने में महीनों का समय लगाया जाता है।

रिपोर्ट में उजागर हुए मुख्य तथ्य

  • लोक-लाज का डर: लगभग 71 प्रतिशत पीड़ितों ने अपने साथ हुए इस दुर्व्यवहार की जानकारी किसी से साझा नहीं की।
  • औपचारिक शिकायत का अभाव: सर्वे में शामिल किसी भी पीड़ित बच्चे ने पुलिस, हेल्पलाइन या सोशल वर्कर से मदद की अपील या रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई।
  • डिजिटल माध्यम: बच्चों के अधिकारों के लिए कार्यरत संस्था 'पहचान' की निदेशक महक नईम के अनुसार, 44 फीसदी ऑनलाइन शोषण मुख्य रूप से व्हाट्सएप और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए हुआ।

सामाजिक दबाव और चुप्पी का फायदा उठा रहे अपराधी

रूढ़िवादी सामाजिक व्यवस्था के कारण सबसे ज्यादा दुष्परिणाम लड़कियों को झेलने पड़ रहे हैं। बदनामी और सामाजिक पाबंदियों के डर से पीड़ित लड़कियां चुप रहने पर मजबूर हैं। कई मामलों में ऐसे मामलों का खुलासा होने पर लड़कियों की पढ़ाई रुक जाती है या उन्हें घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध झेलना पड़ता है। यही डर पीड़ितों को पुलिस या परिजनों के पास जाने से रोकता है, जिसका फायदा उठाकर अपराधी लगातार बच्चों का उत्पीड़न करते रहते हैं।

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