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AI की दुनिया में बड़ा झटका, सबसे ताकतवर एआई मॉडल रातों-रात गैर अमेरिकियों के लिए बैन; भारत के लिए बड़ी चेतावनी

अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक के नए एआई मॉडल ‘फेबल-5’ और ‘मायथोस-5’ पर विदेशी नागरिकों के उपयोग को लेकर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sun, 14 Jun 2026 11:22:44 AM (IST)Updated Date: Sun, 14 Jun 2026 11:44:02 AM (IST)
AI की दुनिया में बड़ा झटका, सबसे ताकतवर एआई मॉडल रातों-रात गैर अमेरिकियों के लिए बैन; भारत के लिए बड़ी चेतावनी
अमेरिका ने विदेशी नागरिकों के लिए बंद किए गए ‘फेबल-5’ और ‘मायथोस-5’ (AI Generated Image)

HighLights

  1. साइबर हमलों के खतरे के चलते प्रतिबंध लगाया गया
  2. एंथ्रोपिक का मॉडल सबसे शक्तिशाली AI माना जा रहा
  3. भारतीय स्टार्टअप्स विदेशी AI एपीआई पर निर्भर बताए गए

डिजिटल डेस्क। एआई टेक्नोलॉजी की दुनिया में कंपनियों के बीच सबसे उन्नत और शक्तिशाली मॉडल विकसित करने की प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है। इसी बीच अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए ‘फेबल-5’ और ‘मायथोस-5’ मॉडल पर अमेरिकी सरकार ने बड़ा प्रतिबंध लगा दिया है।

अमेरिकी प्रशासन ने कंपनी को निर्देश दिया है कि इन मॉडलों को किसी भी विदेशी नागरिक को उपयोग करने की अनुमति न दी जाए। सरकार को आशंका है कि अत्यधिक सक्षम एआई मॉडल का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर हैकिंग, साइबर हमलों और संवेदनशील डिजिटल सिस्टम में सेंध लगाने जैसे कार्यों में किया जा सकता है।


विदेशी यूजर्स के लिए सेवा पूरी तरह बंद

रिपोर्ट के अनुसार, एंथ्रोपिक के पास ऐसा कोई विश्वसनीय तंत्र नहीं है जिससे हर उपयोगकर्ता की राष्ट्रीयता की सटीक पहचान की जा सके। इसी कारण कंपनी को अमेरिका के बाहर के सभी उपयोगकर्ताओं के लिए इन मॉडलों की पहुंच बंद करनी पड़ी है।

इस फैसले को सोशल मीडिया पर टेक उद्योग का ‘9/11’ तक कहा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक एआई इतिहास में यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी कंपनी के अत्याधुनिक और खुले बाजार में उपलब्ध मॉडल को अचानक वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित किया गया है।

साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार, ‘फेबल-5’ और ‘मायथोस-5’ जैसे उन्नत मॉडल साइबर सुरक्षा की कमजोरियों का विश्लेषण करने, मालवेयर जांचने, सैन्य रणनीति और जैविक अनुसंधान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उपयोग किए जा सकते हैं।

यदि कोई एआई मॉडल सॉफ्टवेयर की कमियां खोजने और सिस्टम को तोड़ने के तरीके सुझाने में सक्षम हो जाए, तो वह साइबर हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी सरकार ने इस पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण लागू किया है।

भारत के लिए दो बड़े सबक

कोरोवर. एआई के फाउंडर और सीईओ अंकुश सभरवाल ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि इस फैसले से सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान खुद एंथ्रोपिक और अमेरिका को होगा। उनका कहना है कि जब किसी कंपनी का सबसे उन्नत सॉफ्टवेयर वैश्विक बाजार में उपलब्ध नहीं रहेगा, तो उसके व्यापार और निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी टेक उद्योग में बड़ी संख्या में भारतीय, चीनी और अन्य एशियाई मूल के डेवलपर्स काम करते हैं। ऐसे में पूरी तरह प्रतिबंध लागू करना व्यावहारिक चुनौती भी है। अंकुश सभरवाल के अनुसार, भारत के लिए इससे दो महत्वपूर्ण सबक निकलते हैं। पहला, भारतीय स्टार्टअप्स को केवल विदेशी एआई एपीआई पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। यदि भविष्य में जियो-ब्लॉकिंग या एक्सपोर्ट बैन लागू होते हैं, तो भारतीय कंपनियों का काम प्रभावित हो सकता है।

दूसरा, भारत को केवल विदेशी एआई तकनीक का उपभोक्ता बनने के बजाय अपना स्वदेशी एआई इकोसिस्टम तैयार करना होगा। इसके लिए ‘इंडिया एआई मिशन’, घरेलू एलएलएम और स्वदेशी कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम करने की जरूरत बताई गई है।