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क्या भारत पर फिर टैरिफ लगाएंगे ट्रंप? अमेरिका की 'सेक्शन 301' रिपोर्ट में आया India का नाम

यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के ऑफिस ने भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया है, जो उनके आकलन के अनुसार गलत व्यापारिक तरीके अपनाते ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 03 Jun 2026 03:29:37 PM (IST)Updated Date: Wed, 03 Jun 2026 03:29:37 PM (IST)
क्या भारत पर फिर टैरिफ लगाएंगे ट्रंप? अमेरिका की 'सेक्शन 301' रिपोर्ट में आया India का नाम
क्या भारत पर फिर टैरिफ लगाएंगे ट्रंप?

HighLights

  1. USTR ने प्रभावित देशों पर 10% से 12.5% अतिरिक्त टैक्स का दिया प्रस्ताव
  2. जबरदस्ती मजदूरी रोकने में भारत समेत 60 देश नाकाम, रिपोर्ट में दावा
  3. टेक्सटाइल और कपड़ों के सीमित आयात के लिए कम टैरिफ दर का सुझाव

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार समझौते की बातचीत के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के ऑफिस ने भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया है, जो उनके आकलन के अनुसार गलत व्यापारिक तरीके अपनाते हैं। इन समीक्षा नतीजों के आधार पर, USTR ने प्रभावित देशों से अमेरिका में होने वाले आयात पर 10% से लेकर 12.5% तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाने का एक बड़ा प्रस्ताव दिया है।

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अमेरिका ने क्या दावे किए?

USTR ने हाल ही में 'सेक्शन 301' के तहत की गई 60 अलग-अलग जांचों के नतीजे सार्वजनिक किए हैं। इस रिपोर्ट में भारत को उन 54 अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में चिह्नित किया गया है, जिनके पास जबरदस्ती मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) का इस्तेमाल करके कथित तौर पर बनाए गए सामान के आयात को रोकने या प्रभावी ढंग से प्रतिबंधित करने के लिए पर्याप्त कानूनी या प्रशासनिक उपाय मौजूद नहीं हैं।


टेक्सटाइल और कपड़ों के आयात के लिए अलग व्यवस्था का सुझाव

अमेरिकी व्यापार एजेंसी USTR ने टेक्सटाइल और कपड़ों (कपड़ा उद्योग) के लिए एक विशेष और अलग व्यवस्था का भी सुझाव दिया है। इस व्यवस्था के तहत, चुनिंदा देशों से एक तय मात्रा (कोटा) में होने वाले आयात को अमेरिकी बाजार (यूएस मार्केट) में कम 'सेक्शन 301' टैरिफ दर पर प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही एजेंसी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह इन जांचों के निष्कर्षों के आधार पर जल्द ही उचित व्यापारिक और सुधारात्मक कदम उठाने का इरादा रखती है।

अमेरिकी राजदूत जेमिसन ग्रीर का कड़ा रुख

इस संवेदनशील मुद्दे पर अमेरिकी राजदूत जेमिसन ग्रीर ने सख्त लहजा अपनाते हुए कहा, "हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों का जबरदस्ती कराए गए श्रम (बंधुआ मजदूरी) से बने सामान के आयात के मुद्दे को हल करने में नाकाम रहना पूरी तरह अस्वीकार्य है। इससे वैश्विक व्यापार में ऐसी स्थिति पैदा होती है, जहां अमेरिकी कामगारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक असमान मैदान (Unfair Playing Field) पर मुकाबला करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।"

USTR की इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सहित दुनिया की 60 अर्थव्यवस्थाएं जबरदस्ती मजदूरी से तैयार सामान के आयात पर रोक लगाने और नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रही हैं।

इन 60 देशों और संघों पर मंडराया अतिरिक्त टैरिफ का खतरा

अमेरिकी रिपोर्ट में जिन देशों और क्षेत्रों को नाकाम बताया गया है, उनमें प्रमुख रूप से ये शामिल हैं...

अल्जीरिया, अंगोला, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बहामास, बहरीन, बांग्लादेश, ब्राजील, कंबोडिया, चिली, कोलंबिया, कोस्टा रिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, मिस्र, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, गुयाना, होंडुरास, हांगकांग, चीन, भारत, इराक, इजरायल, जापान, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कुवैत, लीबिया, मलेशिया, मोरक्को, न्यूजीलैंड, निकारागुआ, नाइजीरिया, नॉर्वे, ओमान, पेरू, फिलीपींस, कतर, रूस, सऊदी अरब, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, स्विट्जरलैंड, ताइवान, थाईलैंड, त्रिनिदाद और टोबैगो, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, उरुग्वे, वेनेज़ुएला, कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ (EU), इंडोनेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान और वियतनाम।

आखिर क्या है अमेरिकी कानून की 'धारा 301' (Section 301)?

धारा 301, अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 (US Trade Act 1974) का एक बेहद शक्तिशाली प्रावधान है। यह कानून USTR को विदेशी सरकारों की व्यापारिक नीतियों, तरीकों और उनके कार्यों की विस्तृत जांच करने का कानूनी अधिकार देता है। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि क्या किसी दूसरे देश के व्यापारिक तौर-तरीके अनुचित, भेदभावपूर्ण हैं या क्या वे अमेरिकी व्यापार और वाणिज्यिक हितों पर किसी भी तरह का बेवजह का बोझ डालते हैं।

यदि USTR की जांच में यह निष्कर्ष निकलता है कि किसी देश की नीतियां अमेरिकी वाणिज्य (US Commerce) के लिए नुकसानदेह हैं, तो यह प्रावधान अमेरिकी प्रशासन को उस देश के खिलाफ एकतरफा सुधारात्मक कार्रवाई करने की शक्ति देता है। इसके तहत अमेरिका संबंधित देशों से आने वाले सामान पर भारी-भरकम ऊंचे टैरिफ (सीमा शुल्क) लगा सकता है, व्यापारिक पाबंदियां मढ़ सकता है या अपनी चिंताओं को दूर करने के लिए अन्य कड़े दंडात्मक उपाय अपना सकता है।

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