
मल्टीमीडिया डेस्क। मंगलवार को ब्रिटिश पुलिस ने पाकिस्तानी नेता अल्ताफ हुसैन को लंदन में गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर अल्ताफ और मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट सुर्खियों में आ गई है। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर कौन है और क्या है अल्ताफ हुसैन और एमक्यूएम (मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट)।
17 सितंबर 1953 को कराची में जन्में अल्ताफ हुसैन 1992 से लंदन में स्व-निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। उनके माता-पिता हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त आगरा से कराची चले गए थे।
1980 में अल्ताफ ने पाकिस्तान में एमक्यूएम पार्टी की स्थापना की, जो मुहाजिरों की मुहाफिज पार्टी मानी जाती है। मुहाजिर पाकिस्तान का वह समुदाय है, जो उर्दू जुबान बोलता है और बंटवारे के वक्त भारत से पाकिस्तान आया था।
पार्टी का कराची के शहरी इलाके के साथ ही सिंध और हैदराबाद इलाके में मजबूत जनमत है। पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली में एमक्यूएम चौथी बड़ी पार्टी है।
एमक्यूएम की छवि
मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट पार्टी कई वजहों से देश में बदनाम भी है। मसलन पार्टी पर यह आरोप लगते रहे हैं कि उसके कई नेता नशीली दवाओं के धंधा करते हैं और जमीनों पर अवैध तरीके से कब्जा भी करते हैं। इतना ही नहीं अवैध हथियारों की तस्करी में भी पार्टी का नाम आता रहा है। कहा जाता है कि एमक्यूएम पार्टी कराची में ड्रग इकोनॉकी चलाती है।
लंदन से कराची पर हुकूमत
अल्ताफ हुसैन पर अपनी ही पार्टी के एक नेता इमरान फारूक की हत्या में शामिल होने का आरोप भी है। उन पर यह आरोप भी लगता रहा है कि वो फोन के जरिए अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को लंदन से संबोधित करते रहते हैं और कराची शहर में उनकी मजबूती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लंदन में गिरफ्तारी की खबर आते ही कराची में बंद की घोषणा कर दी गई।
पाकिस्तान की सरकारें भी अल्ताफ को भड़काऊ भाषण और धन उगाही के लिए दोषी मानती हैं। इन मामले के कई मुकदमें उन पर पाकिस्तान की अदालतों में चल रहे हैं।
क्यों हुए गिरफ्तार
लंदन पुलिस ने अल्ताफ ने हवाला मामले में गिरफ्तार किया है। उनके घर से पुलिस को करोड़ो रुपए नकद बरामद हुए हैं।
भारत से संबंध
अल्ताफ हुसैन के दादा मोहम्मद रमजान आगरा के प्रमुख मुफ्ती थे।
शिक्षा और नौकरी
अल्ताफ हुसैन ने फार्मेसी की पढ़ाई पूरी करने के बाद कराची के सेंवेंथ डे एडवेंट अस्पताल में नौकरी शुरू की थी।
कॉलेज के दिनों से ही अल्ताफ राजनीति में सक्रिय हो गए थे। कुछ समय नौकरी करने के बाद अल्ताफ ने सक्रिय राजनीति में आने का फैसला किया और मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट नाम से राजनीतिक पार्टी का गठन किया।
एमक्यूएम और पाकिस्तानी सरकार के बीच कई मर्तबा विरोध की स्थिति बन चुकी है। एक बार तो हालात इतने बिगड़ गए थे कि पाकिस्तानी सरकार ने 1992 में ऑपरेशन क्लीनअप के तहत फौज को कराची भेज दिया था। सेना को आदेश था कि अल्ताफ को खोजकर गिरफ्तार कर लिया जाए। लेकिन इससे पहले ही वो लंदन पहुंच गए थे और वहां राजनीतिक शरण ले ली थी।