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कौन हैं नील कत्याल? शिकागो में जन्मे वह भारतवंशी वकील, जिन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में पलट दिया राष्ट्रपति ट्रंप का फैसला

अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारों पर लगाए गए भारी टैरिफ को असंवैधानिक करार दिलवाने में भारतवंशी वकील नील कत्याल ने नायक की भूमिका निभाई। अमेरिकी सुप्र...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 22 Feb 2026 02:42:52 PM (IST)Updated Date: Sun, 22 Feb 2026 02:42:52 PM (IST)
कौन हैं नील कत्याल? शिकागो में जन्मे वह भारतवंशी वकील, जिन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में पलट दिया राष्ट्रपति ट्रंप का फैसला
कौन हैं नील कत्याल?

HighLights

  1. भारतवंशी वकील का अमेरिका में डंका
  2. नील कत्याल ने SC में जीती टैरिफ की जंग
  3. बोले- राष्ट्रपति भी संविधान से ऊपर नहीं

डिजिटल डेस्क। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी टैरिफ नीति को बड़ा झटका देने में एक भारतीय मूल के वकील की मेधा ने वैश्विक ध्यान खींचा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारों पर लगाए गए भारी टैरिफ को असंवैधानिक करार दिलवाने में भारतवंशी वकील नील कत्याल ने नायक की भूमिका निभाई। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कत्याल की धारदार दलीलों के आगे राष्ट्रपति का आदेश टिक नहीं सका और अदालत ने इसे रद कर दिया।

छोटे कारोबारियों की बने आवाज

भारतीय अप्रवासी माता-पिता की संतान नील कत्याल ने इस मामले में अमेरिकी छोटे कारोबारियों का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के दुरुपयोग को चुनौती दी। कत्याल ने तर्क दिया कि लगभग हर व्यापारिक साझेदार पर आयात शुल्क लगाना न केवल "अन्यायपूर्ण" है, बल्कि "असंवैधानिक" भी है। उनकी इस कानूनी लड़ाई ने साबित कर दिया कि अमेरिका में संविधान की शक्ति किसी भी पद से ऊपर है।


शक्तिशाली व्यक्ति भी नहीं तोड़ सकता संविधान

ऐतिहासिक जीत के बाद कत्याल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए केवल एक शब्द लिखा- "जीत!"। एमएसएनओडब्ल्यू (MSNOW) को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने भावुक होते हुए कहा:

एक अप्रवासी का बेटा होने के नाते मैं अदालत में खड़े होकर छोटे कारोबारियों की ओर से यह कह सका कि राष्ट्रपति गैरकानूनी काम कर रहे हैं। यह अमेरिकी प्रणाली की खूबसूरती है। आप दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन आप संविधान नहीं तोड़ सकते।

शिकागो से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

1970 में शिकागो में जन्मे नील कत्याल की जड़ें भारत से जुड़ी हैं। उनके पिता एक इंजीनियर और मां बाल रोग विशेषज्ञ थीं, जो भारत से अमेरिका जाकर बस गए थे। कत्याल ने बराक ओबामा के कार्यकाल में अमेरिका के कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल के रूप में भी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में वह जार्जटाउन यूनिवर्सिटी में कानून के प्रोफेसर और मिलबैंक एलएलपी में पार्टनर हैं।

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उपलब्धियों से भरा करियर

नील कत्याल केवल इस केस के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जाने जाते हैं:

  • कोर्ट रूम के दिग्गज: उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में अब तक 54 मामलों की पैरवी की है।
  • हाई-प्रोफाइल केस: वह जॉर्ज फ्लॉयड हत्या मामले में विशेष अभियोजक रहे और ट्रंप के 2017 के यात्रा प्रतिबंध के खिलाफ भी मुकदमा लड़ चुके हैं।
  • लेखक और प्रोफेसर: वे 'इम्पीच: द केस अगेंस्ट डोनाल्ड ट्रंप' पुस्तक के लेखक हैं और हार्वर्ड व येल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ा चुके हैं।
  • सर्वोच्च सम्मान: उन्हें अमेरिकी न्याय विभाग का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार 'एडमंड रैंडोल्फ पुरस्कार' मिल चुका है। साथ ही, वे लगातार फोर्ब्स की अमेरिका के शीर्ष 200 वकीलों की सूची में शामिल रहे हैं।