
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर के मुरार क्षेत्र से निकलकर अपने सपनों को नई ऊंचाई देने वाले अमन राजपूत आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। जहां एक ओर युवा बड़ी कंपनियों में मोटे पैकेज वाली नौकरी का सपना देखते हैं, वहीं अमन ने तेलंगाना में 23 लाख रुपये सालाना के आकर्षक पैकेज को ठुकराकर कुछ अलग करने का साहस दिखाया। उन्होंने नौकरी के सुरक्षित रास्ते के बजाय जोखिम भरा लेकिन संतोष देने वाला रास्ता चुना, अपना खुद का बिजनेस।
अमन बताते हैं कि उनकी सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ उनके माता-पिता और दोस्तों का है। पिता मुकेश राजपूत और माता सीमा राजपूत ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। हर मुश्किल घड़ी में उनका साथ दिया और कभी हिम्मत टूटने नहीं दी। उनके दो खास दोस्त संस्कार शिवहरे और अंकित यादव भी हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे।
यूनिवर्सिटी द्वारा टॉप स्टूडेंट अवार्ड से हुए सम्मानित अमन का सफर आसान नहीं था। वे बताते हैं कि स्कूल के दौरान उनके अंक कभी बहुत ज्यादा नहीं रहे, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। लगातार मेहनत, सीखने की चाह और खुद को बेहतर बनाने की जिद ने उन्हें आगे बढ़ाया। इसी मेहनत का परिणाम था कि वर्ष 2022 में उन्हें अमेटी यूनिवर्सिटी द्वारा टॉप स्टूडेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही उन्होंने मार्केटिंग में स्पेशलाइजेशन भी पूरा किया।
अच्छे पैकेज वाली नौकरी का ऑफर मिलने के बावजूद अमन के मन में कुछ अलग करने की चाह थी। वे ग्वालियर में कुछ नया और यूनिक लाना चाहते थे। इसी सोच ने जन्म दिया 'स्काईनाक्स एरिना' को, जो शहर का पहला ट्रैम्पोलिन पार्क है, जहां मनोरंजन और फिटनेस का अनोखा संगम देखने को मिलता है। अमन बताते हैं, "ग्वालियर में इस तरह का कोई एक्टिविटी बेस्ड पार्क नहीं था। मैं चाहता था कि लोग यहां भी बड़े शहरों जैसा अनुभव ले सकें। बस इसी सोच ने मुझे यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।"
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आज स्काईनाक्स एरिना बच्चों, युवाओं और परिवारों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। यहां लोग न केवल मस्ती करते हैं, बल्कि फिटनेस के नए तरीके भी सीखते हैं। अमन का मानना है कि अगर आपके पास कुछ नया करने का जुनून है, तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि सफलता सिर्फ अच्छे अंकों या बड़ी नौकरी से नहीं मिलती, बल्कि अपने सपनों को पहचानने और उन्हें पूरा करने के साहस से मिलती है। अमन ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं होता।