
बिजनेस डेस्क। दिवाली पर कई कंपनियां बोनस देती हैं। लेकिन क्या आपको पता है यह बोनस सिर्फ कंपनी की मर्जी पर निर्भर नहीं करता? बल्कि भारत में एक ऐसा कानून भी है जिसके तहत कर्मचारियों को सालाना बोनस देने के नियम हैं।
भारत में कर्मचारियों के बोनस देने से जुड़े नियम पहले पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 के तहत निर्धारित थे। 21 नवंबर 2025 से लागू वेज कोड, 2019 ने इस कानून के प्रावधानों को अपने अंदर समाहित किया है।
कानून के तहत मिलने वाला सालाना बोनस और त्योहार के मौके पर कंपनी की ओर से दिया जाने वाला अतिरिक्त भुगतान हमेशा एक ही चीज नहीं होते हैं।
वेज कोड के तहत पात्र कर्मचारियों को सालाना बोनस देने का प्रावधान है। यह बोनस कर्मचारी की कमाई और कानून में तय गणना के आधार पर निर्धारित होता है। इसलिए कोई कंपनी यह कहकर पात्र कर्मचारी को अनिवार्य बोनस देने से मना नहीं कर सकती कि वह दिवाली पर बोनस देने की परंपरा नहीं निभाती।
हालांकि बोनस की पात्रता के लिए कानून की सभी शर्तों को देखना जरूरी है। कंपनी में कर्मचारियों की संख्या, कर्मचारी की मासिक मजदूरी और साल में काम किए गए दिनों के आधार पर यह तय होता है कि कोई बोनस पाने का हकदार है या नहीं।
कानून के तहत बोनस का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं।
कर्मचारियों की संख्या: बोनस के नियम सामान्य तौर पर उन प्रतिष्ठानों पर लागू होते हैं, जहां किसी लेखा वर्ष के दौरान किसी भी दिन 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। हालांकि सरकार विशेष अधिसूचना जारी करके इससे कम कर्मचारियों वाले संस्थानों पर भी इसे लागू कर सकती है।
मासिक वेतन सीमा: केंद्र सरकार के वेज कोड के अनुसार बोनस की पात्रता के लिए मासिक वेतन की सीमा 21,000 रुपये तय की गई है। इस सीमा के दायरे में आने वाले कर्मचारी सभी शर्तें पूरी करने पर बोनस पाने के हकदार होते हैं।
कम से कम 30 दिन का काम: कर्मचारी ने संबंधित वित्तीय वर्ष में संस्थान में कम से कम 30 कार्य दिवस पूरे किए हों, तभी उसे वैधानिक बोनस का लाभ मिलता है।
बोनस केवल स्थायी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। यदि जरूरी नियम और शर्तें पूरी होती हैं, तो प्रोबेशनर और पार्ट-टाइम कर्मचारी भी बोनस के हकदार हो सकते हैं।
वेज कोड के तहत पात्र कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बोनस 8.33 प्रतिशत तय किया गया है, जबकि कंपनी के पास पर्याप्त आवंटित अधिशेष होने की स्थिति में यह दर अधिकतम 20 प्रतिशत तक हो सकती है।
बता दें कि आवंटित अधिशेष कंपनी के शुद्ध मुनाफे का वह कानूनी हिस्सा होता है, जिसे नियमानुसार कर्मचारियों में बोनस बांटने के लिए अलग रखा जाता है।
सभी कर्मचारियों को एक समान बोनस मिलना जरूरी नहीं है, क्योंकि वास्तविक भुगतान कर्मचारी के मूल वेतन, काम के कुल दिनों और वैधानिक गणना पर निर्भर करता है।
यदि किसी पात्र कर्मचारी का मासिक वेतन 7,000 रुपये से अधिक है, तो उसके बोनस की गणना 7,000 रुपये या सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी (दोनों में से जो भी अधिक हो) को आधार मानकर ही की जाएगी। गणना का यह नियम केंद्र सरकार की 25 अगस्त 2026 की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है और इसे 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माना गया है।
कानून के तहत मिलने वाला बोनस सालाना भुगतान है और दिवाली बोनस अक्सर त्योहार के मौके पर दिया जाने वाला भुगतान है। इसलिए केवल दिवाली पर बोनस देने से कंपनी कानून के तहत अपनी सालाना बोनस की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती है।