
बिजनेस डेस्क। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट की सुगबुगाहट के साथ ही गलियारों में एक बड़ा सवाल तैर रहा है क्या इस बार बजट की परंपरा रविवार की छुट्टी के कारण बदल जाएगी? 1 फरवरी 2026 को रविवार होने की वजह से बजट की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, लेकिन संसदीय इतिहास और मौजूदा परंपराएं कुछ और ही इशारा कर रही हैं।
साल 2017 से भारत का केंद्रीय बजट हर साल 1 फरवरी को पेश करने की परंपरा शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि नया वित्त वर्ष शुरू होने (1 अप्रैल) से पहले सभी विधायी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएं। इस बार 1 फरवरी को रविवार पड़ रहा है। हालांकि, संसदीय इतिहास गवाह है कि बजट पेश करने के लिए शनिवार और रविवार जैसे अवकाश के दिनों को भी कार्यदिवस में बदला जा चुका है।
जब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा उचित समय पर लिया जाएगा।
यह बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लिए व्यक्तिगत रूप से भी ऐतिहासिक होने वाला है। वह लगातार 9 बार बजट (पूर्ण और अंतरिम मिलाकर) पेश करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री बनेंगी। वह अब पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के 10 बजटों के उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच जाएंगी, जो उन्होंने 1959 से 1969 के बीच अलग-अलग कार्यकाल में बनाए थे।
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अगर 1 फरवरी (रविवार) को बजट पेश होता है, तो यह कोई पहली घटना नहीं होगी। इससे पहले भी कई बार अवकाश के दिनों में संसद चली है:
2017 से पहले बजट फरवरी के आखिरी दिन आता था। तब सरकार को अप्रैल से जून तक के खर्चों के लिए संचित निधि से धन निकालने हेतु 'लेखानुदान' (Vote on Account) का सहारा लेना पड़ता था। 1 फरवरी की तारीख ने इस प्रक्रिया को आसान बना दिया, जिससे बजट प्रस्तावों को लागू करने के लिए पूरे दो महीने का पर्याप्त समय मिल जाता है।