इस देश में 10 ग्राम सोने की कीमत ₹1800 से भी कम... 'कौड़ियों' के भाव मिल रही चांदी, जानें वजह
भारत समेत दुनियाभर के बाजारों में सोने और चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारतीय सर्राफा बाजार में जहां 10 ग्राम सोना 1.40 लाख रुपये और चांदी 2.62 ल ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 13 Jan 2026 04:24:16 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Jan 2026 04:24:16 PM (IST)

डिजिटल डेस्क। भारत समेत दुनियाभर के बाजारों में सोने और चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारतीय सर्राफा बाजार में जहां 10 ग्राम सोना 1.40 लाख रुपये और चांदी 2.62 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंच चुकी है, वहीं दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां इन कीमती धातुओं के दाम सुनकर आप दंग रह जाएंगे। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में सोने और चांदी की कीमतें महज कुछ हजार रुपयों में सिमटी हुई हैं।
वेनेजुएला में सोने का भाव: भारत के मुकाबले बेहद सस्ता
'लाइव प्राइस ऑफ गोल्ड' के आंकड़ों के अनुसार, वेनेजुएला में 24 कैरेट के 1 ग्राम सोने की कीमत 638.75 बोलिवर (वहां की करेंसी) है। यदि इसकी तुलना भारतीय रुपये से करें, तो यह मात्र 174.76 रुपये बैठती है।
- 10 ग्राम सोने का रेट: वेनेजुएला में 6,387.5 बोलिवर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 1,747.63 रुपये।
- भारत में स्थिति: इसके विपरीत भारत में 10 ग्राम सोने के लिए आपको 1,40,482 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
चांदी की कीमतें: यहां भी जमीन-आसमान का अंतर
वेनेजुएला में चांदी की कीमतें भी बेहद कम नजर आती हैं। वहां एक किलो चांदी का रेट 11,909.50 बोलिवर है, जो भारतीय करेंसी में महज 3,258.45 रुपये के बराबर है। वहीं, भारत में एक किलो चांदी की कीमत 2,62,742 रुपये तक पहुंच गई है।
इतना बड़ा अंतर क्यों? जानें इसके पीछे का गणित
वेनेजुएला में सोने-चांदी के इतने कम दाम होने का मतलब यह कतई नहीं है कि वहां की अर्थव्यवस्था मजबूत है या वहां सोना बहुत ज्यादा है। इसके पीछे की असली वजह है वेनेजुएला की करेंसी 'बोलिवर' का भारी अवमूल्यन।
- कमजोर करेंसी: भारतीय रुपया वेनेजुएला की करेंसी के मुकाबले बहुत मजबूत है। 1 भारतीय रुपया करीब 3.65 बोलिवर के बराबर है।
- आर्थिक संकट: वेनेजुएला पिछले कई वर्षों से भयंकर महंगाई (Hyperinflation), राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक कुप्रबंधन से जूझ रहा है।
- करेंसी संकट: वहां की मुद्रा की क्रय शक्ति (Purchasing Power) इतनी गिर चुकी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले वहां के स्थानीय रेट कागजों पर तो कम दिखते हैं, लेकिन आम नागरिकों के लिए उन्हें खरीदना अब भी एक बड़ी चुनौती है।
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