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GST Council 57th Meeting Decisions: ₹5 करोड़ तक की टैक्स गड़बड़ी पर नहीं होगी अब गिरफ्तारी, ₹10 हजार से कम पर नोटिस भी नहीं

कल GST Council की मीटिंग के बाद कई अहम फैसले लिए गए, आइए इस पर एक नजर डालते हैं।

By Shailly AryaEdited By: Shailly Arya
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 10:58:28 AM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 10:58:28 AM (IST)
GST Council 57th Meeting Decisions: ₹5 करोड़ तक की टैक्स गड़बड़ी पर नहीं होगी अब गिरफ्तारी, ₹10 हजार से कम पर नोटिस भी नहीं
GST Council 57th Meeting Decisions

HighLights

  1. GST Council की मीटिंग के बाद कई अहम फैसले लिए गए
  2. ₹5 करोड़ तक की टैक्स गड़बड़ी पर नहीं होगी अब गिरफ्तारी
  3. ₹10 हजार से कम पर नोटिस भी नहीं

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में GST काउंसिल की 57वीं बैठक कल समाप्त हुई, जिसमें सबसे बड़ा फैसला यह था कि टैक्स अधिकारियों के हाथ से गिरफ्तारी की पावर वापस ले ली गई है।

57वीं बैठक में GST मामलों में क्रिमिनल केस की मिनिमम लिमिट ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दी गई है। ₹5 करोड़ से कम की गड़बड़ी को अब सिर्फ जुर्माना भरकर सुलझाया जाएगा, कोई गिरफ्तारी नहीं होगी। यहां तक कि ₹10 हजार से कम की टैक्स चोरी पर कारोबारी को नोटिस भी नहीं दिया जाएगा।


GST काउंसिल की बैठक में क्या-क्या बदलाव किए गए

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  • GST काउंसिल ने टैक्स अधिकारियों से सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार वापस ले लिया है।
  • पहले छोटे-मोटे टैक्स विवादों में भी एक निश्चित सजा काटनी पड़ती थी, अब सरकार ने इस नियम को खत्म कर दिया है।
  • किसी मामले में कितनी सजा होगी, जुर्माना लगेगा या जेल, इसका पूरा फैसला सिर्फ अदालत (कोर्ट) ही करेगी।
  • आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की सीमा 5 गुना बढ़ा दी गई है। पहले ₹1 करोड़ की टैक्स गड़बड़ी पर क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन शुरू किया जा सकता था, जिसे बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है। इसका मतलब ₹5 करोड़ तक के मामलों को अब आपराधिक कार्रवाई के बजाय पेनल्टी और सिविल प्रक्रिया के तहत निपटाया जाएगा।
  • वित्त मंत्रालय के मुताबिक, जिन मामलों में कोई विशेष जुर्माना तय नहीं था, वहां लगने वाली जनरल पेनल्टी को ₹25,000 से घटाकर ₹10,000 कर दिया गया है।
  • वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि टैक्स रेट का स्ट्रक्चर अब स्थिर हो चुका है। अब जीएसटी दरों में कोई भी बदलाव साल में सिर्फ एक बार ही किया जाएगा।