
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। सरकार जीएसटी अधिकारियों को मिले गिरफ्तारी के अधिकार को हटाने पर विचार कर रही है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो GST से जुड़े मामलों में टैक्स अधिकारी सीधे गिरफ्तारी नहीं कर पाएंगे।
फिलहाल GST कानून के तहत गंभीर टैक्स अपराधों के मामलों में गिरफ्तारी का प्रावधान है खासकर फर्जी बिल बनाना, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना और जानबूझकर टैक्स चोरी करने जैसे मामलों में।
CGST Act की धारा 69 के तहत कमिश्नर को गिरफ्तारी की मंजूरी देने का अधिकार है, अगर किसी व्यक्ति ने गंभीर GST अपराध किया है।
साल 2022 में सरकार ने गिरफ्तारी और जमानत को लेकर अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए थे, जिनमें कहा गया था कि गिरफ्तारी सिर्फ इसलिए नहीं होनी चाहिए क्योंकि कानून में इसकी अनुमति है। गिरफ्तारी के लिए मामले की गंभीरता और व्यक्ति की भूमिका समेत दूसरे पहलुओं को देखना भी जरूरी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच पिछले करीब 8-9 महीनों से इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। कारोबारियों और कंपनियों की तरफ से GST जांच और गिरफ्तारी को लेकर अक्सर चिंताएं जताई जाती रही हैं। खासकर कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी को लेकर उद्योग जगत में सवाल उठते रहे हैं।
सरकार अब GST सिस्टम में बदलाव करना चाहती है, जिससे गंभीर धोखाधड़ी पर कार्रवाई भी बनी रहे और कारोबारियों को डर का सामना भी न करना पड़े।
आंकड़ों के मुताबिक, GST कानून के तहत गिरफ्तारी का इस्तेमाल काफी हुआ है। 2021-22 से 2024-25 के बीच 72,393 जीएसटी अपराध दर्ज हुए और केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों ने 887 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये आंकड़ा सिर्फ केंद्रीय जीएसटी विभाग का है, राज्य GST अधिकारियों की गिरफ्तारियां इसमें शामिल नहीं हैं।
यह भी पढ़ें- दीवाली-छठ पर घर जाने वालों को बड़ा झटका! फ्लाइट से यात्रा करना हुआ और महंगा, इंडिगो ने बढ़ाए दाम
फिलहाल सबको 7 अक्टूबर का इंतजार है, उसी दिन जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस पर चर्चा होनी है।