
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जीएसटी में सर्च, जब्ती एवं गिरफ़्तारी से जुड़े कानून काफी कठोर हैं। सामान्य व्यापारी को इन प्रावधानों की जानकारी नहीं होती। जीएसटी के अधिकारियों के पास गिरफ्तारी की शक्तियां भी आ गई है।
अधिकारी कह रहे हैं कि पहले गिरफ्तारी होगी फिर कर चोरी का निर्धारण होगा। ऐसे में कानून की जानकारी नहीं होना काफी जोखिमभरा हो सकता है। टैक्स प्रेक्टिशनर्स एसोसिएशन ने शनिवार को जाल सभागृह में जीएसटी सर्च, जब्ती और गिरफ्तारी के प्रविधानों की जानकारी देने के लिए सेमिनार आयोजित किया। मुख्य वक्ता के रूप में अहमदाबाद से आए चार्टर्ड अकाउंटेंट पुनीत प्रजापति मौजूद रहे।
प्रजापति ने कहा कि वर्तमान कर प्रवर्तन व्यवस्था पूरी तरह इंटेलिजेंस आधारित है। इसके लिए डायरेक्टोरेट जनरल आफ एनालिटिक्स एंड रिस्क मैनेजमेंट (डीजीआरएम) एवं मजबूत आइटी इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग किया जा रहा है। रीजनल इकोनामिक इंटेलिजेंस कमेटी (आरईआइसी) के माध्यम से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय तथा टीडीएस, यूपीआइ एवं यूरिया कमोडिटी ट्रैकिंग जैसी थर्ड पार्टी डेटा ट्रैकिंग के कारण आज के समय में कर कानूनों की अनदेखी करना जोखिमभरा हो सकता है।
सीए प्रजापति ने कहा कि अब “पहले गिरफ्तारी फिर निर्धारण” की प्रवृत्ति बढ़ रही है। जबकि सामान्य सिद्धांत “पहले निर्धारण फिर गिरफ्तारी” का है। सर्च एवं निर्धारण की कार्यवाही अलग-अलग प्राधिकरणों द्वारा की जाती है। उन्होंने कहा कि सर्च के दौरान अधिकारियों को व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं, जिनमें माल अथवा दस्तावेजों तक पहुंच, जब्ती, अलमारी तोड़ना, परिसर सील करना एवं निषेध आदेश जारी करना शामिल है।
प्रक्रिया में इंटेलिजेंस संग्रह, रैकी , पहचान पत्र प्रदर्शित करना तथा पार्टी से सर्च वारंट पर हस्ताक्षर करवाना शामिल है, हालांकि उसकी प्रति देना आवश्यक नहीं है। महिला निवास पर महिला अधिकारियों की उपस्थिति, स्वतंत्र पंच गवाह एवं संवेदनशील परिसरों की वीडियोग्राफी आवश्यक है। हालांकि सर्च के दौरान पेशेवर प्रतिनिधि अथवा वकील मौजूद रह सकते हैं ऐसा कोई वैधानिक अधिकार करदाता को प्राप्त नहीं है। यह अधिकारियों के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है।
सेमिनार में यह भी बताया गया कि जीएसटी की कार्रवाई आयकर के लिए भी आधार बन गई है। दोनों विभाग सूचना एक दूसरे से साझा कर रहे हैं। जीएसटी की कार्यवाही का आयकर पर क्या प्रभाव होगा इस संबंध में अधिवक्ता आशीष गोयल ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जीएसटी सर्च के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज, बही-खाते, स्टॉक रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और अन्य सामग्री का प्रभाव केवल जीएसटी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहता।
सर्च में मिली सामग्री के आधार पर आयकर विभाग द्वारा धारा 148 के तहत पुनर्मूल्यांकन नोटिस जारी किया जा सकता है। करदाताओं को स्टॉक, खरीद-बिक्री, ई-वे बिल, बैंक भुगतान और बही-खातों का नियमित मिलान रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी सर्च में दिया गया कोई भी बयान या दस्तावेज आगे चलकर आयकर आकलन में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है।
टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय बंसल ने कहा की जीएसटी में विभाग के बढ़ते विवाद एवं नोटिस को देखते हुए एक व्यापारी को जीएसटी के मुख्य प्रविधानों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।कार्यक्रम का संचालन सीए कृष्ण गर्ग ने किया। सीए सुनील पी जैन ने व्यापारी को सर्च के दौरान आने वाली समस्याओं से समबधित प्रश्न वक्ताओं के सामने रखें। सेमिनार में क्रेडाई, इंदौर टी मर्चेंट एसोसिएशन, इंदौर होटल एसोसिएशन, सीटीपीए, इंदौर लोहा व्यापारी एसोसिएशन टीपीए एवं अन्य एसोसिएशन के सदस्यों के अलावा बड़ी संख्या में सीए, कर सलाहकार और अधिवक्ता शामिल हुए।