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आपके झड़े हुए बाल बना रहे हैं चीन को अमीर! जानिए तिरुपति के दान किए बालों से लेकर ₹9,000 करोड़ के ग्लोबल बिजनेस का पूरा खेल

भारतीय महिलाओं के लंबे और सुंदर बाल सिर्फ खूबसूरती का प्रतीक नहीं, बल्कि ग्लोबल हेयर मार्केट में अरबों रुपये का बिजनेस बन चुके हैं। आइए, आपको इस इंडस्...और पढ़ें

By Shailly AryaEdited By: Shailly Arya
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 01:15:09 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 01:15:09 PM (IST)
आपके झड़े हुए बाल बना रहे हैं चीन को अमीर! जानिए तिरुपति के दान किए बालों से लेकर ₹9,000 करोड़ के ग्लोबल बिजनेस का पूरा खेल
आपके झड़े हुए बाल बना रहे हैं चीन को अमीर!

HighLights

  1. ग्लोबल मार्केट में भारतीय बालों की भारी मांग है
  2. भारत हर साल 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के Human Hair का एक्सपोर्ट करता है
  3. ग्लोबल हेयर मार्केट में अरबों रुपये का बिजनेस बन चुके हैं

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत हर साल 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के Human Hair का एक्सपोर्ट करता है और इसका सबसे बड़ा खरीदार चीन है।

दुनिया भर में है भारतीय बालों का जलवा

  • ग्लोबल मार्केट में भारतीय बालों की भारी मांग है। वजह है इनकी क्वालिटी, मजबूती और नेचुरल टेक्सचर।
  • स्कैंडिनेवियाई महिलाओं के लिए इससे ऐश-ब्लॉन्ड विग बनाए जाते हैं।
  • रूस में ऑबर्न एक्सटेंशन और अफ्रीकी-अमेरिकियों के लिए काले-भूरे वेफ्ट (बालों की पट्टियां) तैयार होते हैं।
  • चेन्नई की 'राज हेयर इंटरनेशनल' के सीईओ जॉर्ज चेरियन के मुताबिक, भारतीय काले और भूरे बाल एक ऐसा वर्सटाइल बेस देते हैं, जिन्हें दुनिया भर के 47 अलग-अलग शेड्स में आसानी से रंगा और ढाला जा सकता है।

9,000 करोड़ से ज्यादा के बाल एक्सपोर्ट किए गए

  • वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने करीब 94 करोड़ डॉलर यानी ₹9,000 करोड़ से ज्यादा के बाल एक्सपोर्ट किए।
  • कच्चे बाल (Raw Hair): लगभग $28.7 करोड़।
  • सेमी-प्रोसेस्ड बाल: करीब $65.2 करोड़, इन्हें तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और बंगाल के ग्रामीण हब में सुलझाया जाता है।
  • फिनिश्ड प्रोडक्ट्स (विग/एक्सटेंशन): भारत का प्रोसेस्ड हेयर मार्केट बेहद छोटा है, जो सिर्फ $13.5 लाख का एक्सपोर्ट कर पाता है।

असली खेल तो चीन खेलता है

भारत से लगभग 98% कच्चे बाल म्यांमार के रास्ते चीन के 'जुचांग' (Juchang) शहर पहुंचते हैं। हेनान प्रांत का यह शहर दुनिया की 'विग कैपिटल' कहलाता है, जहां दुनिया के 60% तैयार हेयर प्रोडक्ट्स बनते हैं। यानी बाल भारत के होते हैं, लेकिन वैल्यू-एडिशन करके अरबों का मुनाफा चीन कमाता है!

कहां से आते हैं ये बाल?

  • चेन्नई के 'एल्योर हेयर प्रोडक्ट्स' के मुताबिक, एक्सपोर्ट होने वाले 90% बाल वो गुच्छे होते हैं, जो नाई की दुकानों, सैलून और घरों में कंघी करते वक्त झड़ते हैं।
  • बाकी 10% बाल तिरुपति बालाजी और तमिलनाडु के वेलंकन्नी जैसे धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं द्वारा दान किए जाते हैं। यह टॉप-क्वालिटी का बाल होता है।

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ऑनलाइन नीलामी और चीन की चाल!

तिरुपति मंदिर में हर तीन महीने में होने वाली बालों की ऑनलाइन नीलामी में बोलियां आसमान छूने लगती हैं। ग्रेड-1 (27 इंच से लंबे काले बाल) की कीमत ₹85,000 प्रति किलो तक पहुंच जाती है।

भारतीय एक्सपोर्टर्स का दावा है कि नीलामी में यह बेतहाशा बोली चीन के डमी एक्सपोर्टर्स लगवाते हैं ताकि भारत के सबसे प्रीमियम 'रेमी हेयर' पर उनका कब्जा रहे। यहां तक कि खबर तो यह भी है कि चीन में लेबर कॉस्ट बढ़ने के कारण अब कुछ कंपनियां इन बालों को प्रोसेसिंग के लिए उत्तर कोरिया (प्योंगयांग) भी भेज रही हैं।