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बिजनेस डेस्क। आज 4 नवंबर 2026 को इंदौर सराफा बाजार में 24 कैरेट (999) सोने का भाव 1,42,109 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। वहीं 22 कैरेट (916) सोने की कीमत 1,30,172 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट (750) सोने का भाव 1,06,582 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है। शुद्ध चांदी (999) का भाव 1,85,519 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और लेवाली घटने के चलते इंदौर में चांदी चौरसा 4,100 रुपये की भारी गिरावट के साथ 1,80,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है, जो सोमवार को 1,84,300 रुपये पर थी।
धनतेरस का त्योहार नजदीक होने के कारण ज्वेलर्स बाजार में बेहतर ग्राहकी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय हलचलों के बावजूद स्थानीय स्तर पर कारोबारी दाम बढ़ाने के इच्छुक नहीं हैं, ताकि कीमतों में स्थिरता से त्योहारी खरीदारी को बढ़ावा मिल सके।
वैश्विक बिकवाली और कच्चे तेल के दामों में नरमी के बीच निवेशक बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अनुसार, दिल्ली में सोने की कीमत 700 रुपये टूटकर 1,41,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है। वहीं चांदी का भाव 2,000 रुपये घटकर 1.84 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है।
मंगलवार को विदेशी बाजारों में चांदी में जमकर मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई.
कामेक्स सोना वायदा: 3,901 डॉलर प्रति औंस पर टिका रहा (कारोबार के दौरान ऊपर में 3,964 डॉलर और नीचे में 3,892 डॉलर दर्ज हुआ)।
कामेक्स चांदी वायदा: 142 सेंट टूटकर 48.89 डॉलर प्रति औंस पर आ गई (ऊपरी स्तर 50.86 डॉलर और निचला स्तर 48.61 डॉलर रहा)।
स्पॉट मार्केट: वैश्विक स्तर पर स्पॉट गोल्ड 1.04 प्रतिशत गिरकर 3,905.44 डॉलर प्रति औंस और स्पॉट चांदी 3 प्रतिशत फिसलकर 48.97 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रिकॉर्ड तोड़ ऊंची कीमतों की वजह से साल 2026 में भारत में सोने की कुल मांग घटकर करीब 650 मीट्रिक टन पर सिमट सकती है। खपत का यह स्तर पिछले छह वर्षों में सबसे निचला स्तर होगा।
सितंबर तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, सालाना आधार पर सोने की मांग 29 प्रतिशत घटकर 162.5 मीट्रिक टन रह गई है। इसमें आभूषणों की खपत में 20 प्रतिशत और निवेश मांग में 40 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। कमजोर मानसून और बढ़ती महंगाई के चलते ग्रामीण इलाकों में लोगों की आय प्रभावित हुई है। हालांकि, धनतेरस, दिवाली और आगामी शादियों के सीजन से बाजार को कुछ सहारा जरूर मिल सकता है, लेकिन ऊंची कीमतें मांग की रिकवरी को सीमित रख सकती हैं।