
बिजनेस डेस्क। आज देश के घर-घर में हाई-स्पीड इंटरनेट चल रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में इस डिजिटल क्रांति की नींव ईशा अंबानी की एक छोटी सी शिकायत से शुरू हुई थी? जी हां, जिस रिलायंस जियो ने भारत के लोगों का इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका ही बदल दिया, उसकी शुरुआत किसी बोर्डरूम की गंभीर मीटिंग से नहीं बल्कि अंबानी परिवार के घर में हुई एक साधारण बातचीत से हुई थी।
साल 2011 की बात है, ईशा अंबानी उस समय अमेरिका की मशहूर येल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थीं। छुट्टियों में जब वह भारत अपने घर मुंबई आईं, तो उन्हें अपना कॉलेज असाइनमेंट सबमिट करना था। लेकिन उस समय इंटरनेट की स्पीड इतनी धीमी थी और कनेक्शन बार-बार कट रहा था कि ईशा परेशान हो गईं। उन्होंने सीधे अपने पिता मुकेश अंबानी से शिकायत की कि घर का इंटरनेट बहुत खराब है।
उस दौर में स्लो इंटरनेट की ये परेशानी हर आम भारतीय की थी। लेकिन ईशा की इस शिकायत ने मुकेश अंबानी का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचा।
ईशा अंबानी की परेशानी को देखकर उनके भाई आकाश अंबानी ने इस मौके को एक बड़े अवसर के रूप में देखा। उस समय टेलीकॉम का मतलब सिर्फ फोन पर कॉल करना और मिनटों के हिसाब से पैसे चुकाना होता था। लेकिन नई पीढ़ी के लिए पढ़ाई, शॉपिंग, एंटरटेनमेंट और रिश्तों से जुड़े रहने का जरिया इंटरनेट बन चुका था। आकाश अंबानी ने माना कि आने वाला समय फोन कॉल से ज्यादा डेटा का होने वाला है। दोनों भाई-बहन की इस नई सोच ने रिलायंस को एक नए रास्ते पर ला खड़ा किया।
सितंबर 2016 में जब रिलायंस जियो लॉन्च हुआ, तो उसने भारत के टेलीकॉम मार्केट को पूरी तरह बदलकर रख दिया। सस्ता और मुफ्त डेटा मिलने से देश के करोड़ों लोग पहली बार इंटरनेट से जुड़े। बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई करने लगे, छोटे दुकानदारों को फोन पर ग्राहक मिलने लगे और दूर-दराज के गांवों में बैठे लोग भी विदेशों में अपने परिजनों से वीडियो कॉल पर आसानी से बात करने लगे।
साल 2020 में जब कोरोना महामारी के दौरान सब कुछ बंद हो गया, तब घर ही स्कूल, ऑफिस और क्लिनिक बन गए। ऐसे समय में जियो का नेटवर्क लाखों लोगों के लिए लाइफलाइन साबित हुआ।