
बिजनेस डेस्क। भारतीय रेल नेटवर्क दुनिया के सबसे विशाल तंत्रों में से एक है, जिसमें हजारों स्टेशन शामिल हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का सबसे बड़ा और व्यस्ततम रेलवे स्टेशन (busiest and largest train stations) कौन सा है? पश्चिम बंगाल के हावड़ा शहर में स्थित 'हावड़ा जंक्शन' को भारत का सबसे बड़ा रेलवे कॉम्प्लेक्स होने का गौरव प्राप्त है। यह न केवल कोलकाता मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की लाइफलाइन है, बल्कि अपनी ऐतिहासिक वास्तुकला और विशालता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
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हावड़ा स्टेशन की क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां कुल 23 प्लेटफॉर्म हैं। लगभग 66.7 एकड़ (270,000 वर्ग मीटर) में फैले इस विशाल स्टेशन से प्रतिदिन 600 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। प्लेटफॉर्म की संख्या और आकार के मामले में यह देश का शीर्ष स्टेशन है, जो हर दिन लगभग 10 लाख से अधिक यात्रियों को उनकी मंजिलों तक पहुंचाने में मदद करता है। इतनी बड़ी संख्या इसे दुनिया के सबसे व्यस्त स्टेशनों की श्रेणी में खड़ा करती है।
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इस ऐतिहासिक स्टेशन की नींव ब्रिटिश काल में पड़ी थी। साल 1849 में ईस्ट इंडियन रेलवे कंपनी और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच एक अनुबंध हुआ था। हुगली नदी के दाहिनी ओर स्टेशन बनाने का विचार सबसे पहले 1846 में इंजीनियर फ्रेडरिक वाल्टर सिम्स ने दिया था। पर्याप्त फंड मिलने के बाद हावड़ा को नई रेल लाइन के टर्मिनस के रूप में चुना गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, 1852 में इसके निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे, जिनकी शुरुआती कीमत 1.90 लाख से 2.74 लाख रुपये के बीच थी।

हावड़ा स्टेशन का सफर 1854 में औपचारिक रूप से शुरू हुआ। समय की मांग के साथ इसमें लगातार विस्तार और आधुनिकीकरण होता रहा। स्थापना के ठीक 100 साल बाद, यानी 1954 में इस पूरे जंक्शन का विद्युतीकरण (Electrification) किया गया। वर्तमान में यह स्टेशन न केवल अपनी पुरानी लाल ईंटों वाली भव्य इमारत के लिए जाना जाता है, बल्कि यह पूर्वी भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र भी है।

आज हावड़ा जंक्शन भारतीय रेलवे के गौरवपूर्ण इतिहास और आधुनिक प्रगति का एक अनूठा संगम है। 172 सालों के लंबे सफर के बाद भी इसकी चमक फीकी नहीं पड़ी है। कोलकाता मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की सेवा करने वाले पांच प्रमुख इंटरसिटी स्टेशनों में से यह सबसे प्रमुख है। करोड़ों लोगों की यादें और देश का व्यापारिक ढांचा इस स्टेशन की पटरियों पर टिका हुआ है, जो इसे भारत का वास्तव में 'रॉकिंग' रेलवे हब बनाता है।