
बिजनेस डेस्क। कई बार होता है कि हम लंबी अवधि के लिए गृह ऋण तो ले लेते हैं, लेकिन जैसे ही पैसों का इंतजाम होता है हम सबसे पहले गृह ऋण का भुगतान कर देते हैं। इसके लिए एकमुश्त पैसा जमा कराने को भी हम तैयार हो जाते हैं। यह बात सही है कि इसके पीछे हमारी सोच यह होती है कि जितनी जल्दी ऋण से मुक्त हो जाएं उतना अच्छा है, लेकिन हमारी यह सोच ही हमें नुकसान पहुंचाती है।
यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस सोच की वजह से हमें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पहली बात तो यह कि एकमुश्त ऋण चुकाने में हमारी पूंजी (केपिटल) खत्म हो जाती है। दूसरा यह कि इस राशि को ऋण चुकाने के बजाय अगर हम और कहीं निवेश करते तो जो रिटर्न हमें मिलता वह गृह ऋण पर लगने वाले ब्याज से कहीं ज्यादा होता।
सीए अनुज माहेश्वरी का कहना है कि इस मामले को ऐसे भी समझा जा सकता है कि सामान्यत म्यूचुअल फंड 11 से 12 प्रतिशत रिटर्न देते हैं, जबकि गृह ऋण पर ब्याज दर 8.50 से 9.50 प्रतिशत के आस-पास रहती है। मतलब साफ है कि एकमुश्त ऋण चुकाने से हमको दो से तीन प्रतिशत रिटर्न का सीधा-सीधा नुकसान होता है। इसके अलावा हमारी पूंजी खत्म हो जाती है वह अलग। ऋण चुकता करने के बजाय गोल्ड या शेयर मार्केट में निवेश किया जा सकता है। ऐसा करने पर हमें अधिक रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।
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एक बात और है जो महत्वपूर्ण है। यह कि गृह ऋण के जल्दी भुगतान का सीधा असर हमारे सिबिल स्कोर पर पड़ता है। जो लोग समय से पहले गृह ऋण का भुगतान कर देते हैं उन्हें भविष्य मे नया ऋण कुछ ज्यादा ब्याज दर पर मिलता है। जो लोग गृह ऋण को पूरी समयावधि तक चलाते हैं उनका सिबिल स्कोर ज्यादा अच्छा होता है।
उन्हे नया ऋण कम ब्याज दर पर मिल जाता है। अगर हम कुछ वर्षो बाद नया Top Up लोन भी इसी संपत्ति पर लेते हैं तो कम दस्तावेज, कम लोन फीस, और कम ब्याज दर पर ऋण ले सकते हैं। मतलब बिलकुल साफ है कि गृह ऋण के भुगतान की जल्दी न करें। एकमुश्त में भुगतान तो बिलकुल भी न करें।
