
बिजनेस डेस्क। सबसे पहले समझो NAV नेट एसेट वैल्यू (Net Asset Value) क्या होता है। NAV बेसिकली म्यूचुअल फंड की एक यूनिट की वैल्यू होती है। अगर किसी फंड का NAV ₹50 है, तो उस फंड की एक यूनिट की कीमत ₹50 है।
फंड में कुल कितना पैसा लगा हुआ है? यह बताता है AUM एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (Assets Under Management)।
AUM का मतलब है कि म्यूचुअल फंड कंपनी निवेशकों का कुल कितना पैसा मैनेज कर रही है। जैसे किसी फंड का AUM ₹10,000 करोड़ है, तो इसका मतलब है कि फंड हाउस ₹10,000 करोड़ के एसेट्स मैनेज कर रहा है।
फंड को मैनेज करने में भी कुछ खर्च आता है। इसी खर्च को एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio) बोलते हैं।
एक्सपेंस रेशियो वो सालाना फीस है, जो फंड के खर्चों को चलाने के लिए स्कीम से चार्ज की जाती है। मान लीजिए अगर एक्सपेंस रेशियो 1% है, तो आपके ₹100 के इन्वेस्टमेंट पर करीब ₹1 सालाना फीस के तौर पर कटेगा।
अब मान लीजिए आपने म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट किया, लेकिन कुछ समय बाद आपको अपना पैसा निकालना है।
तो इसके लिए आता है एग्जिट लोड (Exit Load)। अगर आप तय समय सीमा (Specified Period) से पहले म्यूचुअल फंड से पैसा निकालते हैं, तो कुछ पेनल्टी या चार्ज लगता है, जिसे एग्जिट लोड कहते हैं।
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अब एक और कॉमन टर्म है SIP सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (Systematic Investment Plan)।
SIP कोई अलग प्रोडक्ट नहीं है। म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट है, और SIP उसमें पैसे लगाने का एक तरीका है। इसमें आप एक फिक्स्ड अमाउंट हर महीने, Weekly या Quartely इन्वेस्ट करते हैं।
जब आप म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करते हैं, तो आपके इन्वेस्टमेंट को पहचानने के लिए एक यूनिक नंबर मिलता है फोलियो नंबर (Folio Number)।
इसे आप अपने म्यूचुअल फंड अकाउंट का आइडेंटिफिकेशन नंबर समझ सकते हैं।
जब आप अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स को बेचकर पैसा वापस बैंक में लेते हैं, तो उस प्रोसेस को रिडेम्पशन (Redemption) कहते हैं।
लेकिन अगर आप एक म्यूचुअल फंड स्कीम से पैसा निकालकर, उसी फंड हाउस की किसी दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करते हैं, तो इसे स्विच (Switch) कहते हैं।