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RBI MPC Meeting: आज खत्म होगी 3 दिवसीय बैठक, विदेशी निवेशकों की निकासी और कच्चे तेल की मार के बीच क्या 5.50% पहुंचेगा रेपो रेट?

आज तीन दिवसीय मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की बैठक खत्म होने वाली है और लोगों को इसके अंतिम फैसले का इंतजार है।

By Shailly AryaEdited By: Shailly Arya
Publish Date: Wed, 07 Oct 2026 07:59:20 AM (IST)Updated Date: Wed, 07 Oct 2026 07:59:20 AM (IST)
RBI MPC Meeting: आज खत्म होगी 3 दिवसीय बैठक, विदेशी निवेशकों की निकासी और कच्चे तेल की मार के बीच क्या 5.50% पहुंचेगा रेपो रेट?
RBI MPC Meeting

HighLights

  1. RBI MPC Meeting 5 अक्टूबर से शुरू हुई थी
  2. आज तीन दिवसीय मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की बैठक खत्म होने वाली है
  3. रेपो रेट बढ़ने की उम्मीद क्यों जताई जा रही है?

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। RBI MPC Meeting 5 अक्टूबर से शुरू हुई थी और 7 अक्टूबर यानी आज फैसले का दिन है। 7 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे से गवर्नर संजय मल्होत्रा अपना फैसला बताएंगे।

RBI की लगातार 21 MPC बैठकों में ब्याज दर नहीं बढ़ी है। लेकिन आज 7 अक्टूबर को माना जा रहा है कि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगा।

रेपो रेट बढ़ने की उम्मीद क्यों जताई जा रही है?

फेडरल रिजर्व ने बढ़ाया था इंटरेस्ट रेट

पिछले महीने सितंबर 2026 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने भी ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25% की बढ़ोतरी की है, जिससे ब्याज दर बढ़कर 3.75% से 4.00% के दायरे में पहुंच गई है। रिजर्व बैंक पर इसका भी दबाव है क्योंकि फेड रिजर्व के ब्याज दरें बढ़ाने के बाद अगर आरबीआई चुप बैठता है, तो विदेशी निवेशक भारत के बाजारों से अपना निवेश निकालकर अमेरिका में शिफ्ट करने लगते हैं।


2026 में ही विदेशी निवेशकों ने अब तक भारतीय बाजारों से 2.41 लाख करोड़ से अधिक की भारी-भरकम रकम निकाली है। पिछले महीने भी 35,000 करोड़ से ज्यादा की बिकवाली देखने को मिली है। पूंजी को बाहर जाने से रोकने के लिए रिजर्व बैंक को अपनी नीतिगत दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।

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महंगाई का दबाव

महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, भारत की CPI अगस्त 2026 में बढ़कर 4.82% हो गई, जो लगातार तीसरे महीने रिजर्व बैंक के 4% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। इंवेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों की कीमत ऊपर बनी हुई है, कोर महंगाई भी बढ़कर 4.16% हो गई है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।