
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। सरिया एक बार फिर महंगा हो गया है। मई 2025 में 53 हजार रुपये प्रति टन बिकने वाला सरिया अब 65 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गया है। यानी महज एक साल में 12 हजार रुपये प्रति टन की तेजी दर्ज की गई है।
हालांकि, यह अब भी 2022 के उस रिकॉर्ड स्तर से नीचे है, जब सरिया पहली बार 80 हजार रुपये प्रति टन के पार पहुंचा था।
बढ़ती कीमतों ने बिल्डरों, ठेकेदारों और मकान बनाने वालों की लागत बढ़ा दी है। वहीं बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मांग, उत्पादन और कच्चे माल की उपलब्धता के आधार पर आने वाले महीनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव संभव है।
रायपुर और छत्तीसगढ़ देश के बड़े सरिया उत्पादक केंद्र हैं, इसलिए यहां की कीमतों का असर राष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ता है।
सरिया बाजार ने पिछले पांच वर्षों में भारी उतार-चढ़ाव देखा है। 2019 में कीमतें 52 से 53 हजार रुपये प्रति टन थीं। इसके बाद 2022 में रिकॉर्ड तेजी आई और भाव 80 हजार रुपये प्रति टन के पार पहुंच गए। फिर कीमतों में नरमी आई। लेकिन लंबे समय तक यह 60 हजार रुपये के आसपास बनी रहीं। 2025 में फिर 53 हजार रुपये प्रति टन का स्तर देखने को मिला।
अब एक बार फिर बाजार में तेजी लौट आई है और दाम 65 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गए हैं। ईरान-इजरायल, अमेरिका युद्ध बना कारण सरिया के बढ़ते दाम का मुख्य कारण ईरान-इजरायल, अमेरिका युद्ध बना है। इसके चलते बाहरी कोयले की आवक प्रभावित हुई, जिसके चलते रेट बढ़े हैं।
प्रदेश में रोजाना लगभग 20 हजार टन सरिया उत्पादन की क्षमता है। इसमें अकेले रायपुर का योगदान 12 से 13 हजार टन है। हालांकि माना जा रहा है कि तीन मई के बाद पेट्रोल-डीजल के भाव में वृद्धि हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो सरिया के दाम में तेजी देखने को मिलेगी।
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छत्तीसगढ़ में उत्पादित सरिया का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा दूसरे राज्यों में भेजा जाता है। केवल 30 प्रतिशत खपत प्रदेश के भीतर होती है। ऐसे में बाहरी राज्यों की मांग सीधे स्थानीय कीमतों और उत्पादन को प्रभावित करती है। जब बाहर से आर्डर घटता है तो उत्पादन कम करना पड़ता है। वहीं जब आर्डर बढ़ते हैं तो उत्पादन बढ़ता है।
युद्ध का असर लोहा बाजार में पड़ा है। बाहरी कोयले की आवक प्रभावित होने से दामों में वृद्धि आई थी। लेकिन अब धीरे-धीरे दाम स्थिर हो रहे हैं।
- मनोज अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़, रोलिंग मिल एसोसिएशन