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टाटा साम्राज्य में आई दरार, Tata Sons और Tata Trusts के बीच बढ़ा विवाद, आमने-सामने आए देश के दो दिग्गज वकील, देखें क्या है पूरा मामला

देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा साम्राज्य में दरार देखने को मिल रही है। टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच विवाद हो गया है और कोई छोटा मोटा विवाद न...और पढ़ें

By Shailly AryaEdited By: Shailly Arya
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 12:02:35 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 01:04:37 PM (IST)
टाटा साम्राज्य में आई दरार, Tata Sons और Tata Trusts के बीच बढ़ा विवाद, आमने-सामने आए देश के दो दिग्गज वकील, देखें क्या है पूरा मामला
टाटा साम्राज्य में आई दरार

HighLights

  1. Tata Sons और Tata Trusts के बीच बढ़ा विवाद
  2. देश के दो दिग्गज वकील आमने सामने आ गए
  3. अभिषेक मनु सिंघवी और हरीश साल्वे ने क्या कहा

बिजनेस डेस्क। टाटा ग्रुप पर अधिकार को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस आमने सामने आ गए हैं। रिपोर्टस के मुताबिक, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल की नियुक्ति को लेकर सारा बवाल खड़ा हुआ है।

नोएल टाटा के दोबारा नियुक्ति को लेकर हुआ विवाद

17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड की बैठक हुई थी, बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को अगले 5 सालों के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त करने का प्रस्ताव किया। जिस पर टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने कड़ा विरोध किया और इस प्लान को 'गैर-कानूनी' और 'कानूनी रूप से शून्य' करार दिया।

नोएल टाटा ने क्या कहा ?

नोएल टाटा ने कहा कि चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव गैरकानूनी हैं। उन्होंने कंपनी से मांग करते हुए कहा कि बैठक में जो कुछ हुआ, उस पर एक पब्लिक करेक्शन जारी करें। बता दें कि टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी है। माना जा रहा है कि विवाद की एक और वजह है टाटा संस की लिस्टिंग भी हैं।


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देश के दो दिग्गज वकील आमने सामने

अब ये मामला सिर्फ बोर्ड तक सिमित नहीं रहा बात कोर्ट तक पहुंच गई हैं। देश के दो दिग्गज वकील आमने सामने आ गए है। अभिषेक मनु सिंघवी, टाटा संस के फैसलों को चुनौती दे रहे और टाटा ट्रस्ट्स का प्रमुख चेहरा बन गए हैं और हरीश साल्वे मजबूती से टाटा संस और उसके चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के बचाव में खड़े हैं।

सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि शेयरधारक-मालिकों के मौलिक अधिकारों को उस तरह से खत्म नहीं किया जा सकता, जिस तरह से किया गया है। उन्होंने कहा, "टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच सौ साल से भी ज्यादा समय से चले आ रहे गहरे रिश्ते को तोड़ना और एक-दूसरे से अलग करना अकल्पनीय लगता है।"

इसके साथ ही उन्होंने कहा, "वोटिंग में ट्रस्ट की आम सहमति की अनिवार्य शर्त और दशकों से बिना किसी विवाद के लागू प्रावधानों में स्पष्ट वीटो अधिकार को नजरअंदाज करना पूरी तरह से अनुचित लगता है।"

जबकि सीनियर वकील हरीश साल्वे ने टाटा संस की कानूनी स्थिति को कानूनी रूप से एकदम सही बताया है। उन्होंने कहा कि कंपनी को RBI के नियमों का पालन करना होगा, जिसमें पब्लिक कंपनी बनना भी शामिल है।