
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम : वर्ष 2026 में सोना-चांदी के बाजार में आए तीव्र उतार-चढ़ाव ने निवेशकों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के समीकरण बदल दिए हैं। जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे दोनों कीमती धातुओं के भाव जुलाई तक बड़ी गिरावट दर्ज कर चुके हैं। इससे जहां आवश्यक खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं को राहत मिली है, वहीं ऊंचे दाम पर खरीद करने वाले निवेशकों और व्यापारियों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
सराफा कारोबारियों के अनुसार जनवरी में एमसीएक्स (मशीन) पर चांदी का भाव चार लाख रुपये प्रति किलो और सोना करीब 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। उस समय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती रुचि के कारण कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई थी। इसके विपरीत जुलाई में बाजार की धारणा बदलने के साथ चांदी का भाव घटकर करीब 2.13 लाख रुपये प्रति बिल और सोना 1.39 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ गया है। कुछ ही महीनों में आई इस बड़ी गिरावट ने बाजार को असमंजस की स्थिति में ला खड़ा किया है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, डालर की मजबूती, ब्याज दरों में बदलाव और निवेशकों की बदलती रणनीति का सीधा असर मूल्यवान धातुओं की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। लगातार गिरते भाव के कारण खरीदार फिलहाल इंतजार की रणनीति अपना रहे हैं, जबकि कई निवेशक आगे और गिरावट की संभावना को देखते हुए नए निवेश से बच रहे हैं।
सराफा बाजार में इन दिनों सबसे अधिक चर्चा भविष्य के भावों को लेकर है। कारोबारियों और निवेशकों के बीच यह धारणा बन रही है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो चांदी का भाव 1.50 लाख रुपये प्रतिकिलो और सोना 80 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक भी आ सकता है। हालांकि विशेषज्ञ इसे केवल बाजार की संभावनाएं मानते हुए निवेशकों को अफवाहों के बजाय वैश्विक आर्थिक संकेतकों और वास्तविक बाजार स्थिति पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं।
गिरते भाव से आभूषणों की खरीदारी में रुचि बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन भविष्य में कीमतें और कम होने की संभावना के चलते कई उपभोक्ता अभी भी खरीदारी टाल रहे हैं। ऐसे में सराफा बाजार में कारोबार सामान्य से धीमा बना हुआ है और आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम ही सोना-चांदी की दिशा तय करेंगे। सराफा व्यवसायी ऋषभ संघवी और प्रतीक जैन का कहना है कि वैश्विक स्तर पर भारी उथल-पुथल ने सराफा में कामकाज बिगाड़ दिया है। लगातार भाव गिरने के बाद भी बाजार में न तो अच्छी लेवाली है और न ही बिकवाली। ऐसी स्थिति में कामकाज को ठंड लग गई है और सराफा से जुड़े लोग हाथ पर हाथ रखकर बैठे हैं।