
बिजनेस डेस्क। देश में ग्रीन एनर्जी उत्पादन को गति देने और जैविक कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार ने ‘गोबर-धन’ (GOBAR-dhan) योजना के तहत 23,731 करोड़ रुपये के बड़े प्रोत्साहन पैकेज की रूपरेखा पेश की है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी परिचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक प्रभावी रहेगी। इसका मुख्य उद्देश्य निजी निवेश को आकर्षित करना, बायोगैस अवसंरचना को मजबूत बनाना और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादकों को एक स्थिर बाजार उपलब्ध कराना है।
योजना की सबसे बड़ी विशेषता सीबीजी निर्माताओं को दी जाने वाली बाजार सुरक्षा है। नए नियमों के तहत, अर्हता प्राप्त निर्माता अपनी कुल बिक्री योग्य गैस का 100 प्रतिशत तक सुनिश्चित रूप से बेचने का विकल्प चुन सकेंगे।
सरकार ने सीबीजी के लिए 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू (एमएमबीटीयू) का प्रशासित मूल्य निर्धारित किया है, जो 95 प्रतिशत मीथेन शुद्धता के आधार पर लगभग 98 रुपये प्रति किलोग्राम बैठता है (इसमें कर एवं कंप्रेशन शुल्क शामिल नहीं हैं)। यह तय कीमत कम से कम 31 मार्च 2036 तक लागू रहेगी, जिसे उत्पादन लागत और मुद्रास्फीति के आधार पर आगे संशोधित भी किया जा सकेगा।
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए सीएनजी (परिवहन) और पीएनजी (घरेलू) आपूर्ति में सीबीजी का मिश्रण अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत कंपनियों को वित्त वर्ष 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत सीबीजी की खरीद व बिक्री करनी होगी। गैस आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए क्लस्टर-आधारित मॉडल अपनाकर सीबीजी को मुख्य पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
यह भी पढ़ें- UPI पेमेंट पर क्या बदलेगा और क्या रहेगा फ्री? जानिए 8 सवालों के जवाब जो दूर करेंगे आपकी हर उलझन
‘गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन’ (GOBAR-dhan) पहल के जरिए मवेशियों के गोबर, कृषि अवशेषों, ठोस जैविक कचरे और खाद्य अपशिष्ट को स्वच्छ ऊर्जा में बदला जा रहा है। इस प्रक्रिया से न केवल सीबीजी और बायोगैस का निर्माण होता है, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद भी तैयार होती है, जो कृषि क्षेत्र के लिए भी बेहद लाभकारी साबित हो रही है।