
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर: बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प एक मां के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन सकता है। इसकी मिसाल हैं इंदु लता गुप्ता, जिन्होंने पति के निधन के बाद आर्थिक कठिनाइयों के बीच न केवल चार बेटियों की जिम्मेदारी संभाली, बल्कि स्वरोजगार के माध्यम से उनकी उच्च शिक्षा का रास्ता भी तैयार किया।
छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है, जबकि दूसरी इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर रही है। शेष दो बेटियां भी स्कूली शिक्षा हासिल कर रही हैं।
आर्थिक संकट के बीच जारी रहा संघर्ष
इंदु लता गुप्ता बताती हैं कि पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई थी। आय का कोई नियमित साधन नहीं होने से घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया था। चारों बेटियों की पढ़ाई और उनके भविष्य को लेकर वे लगातार चिंतित रहती थीं। ऐसे समय में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती परिवार की आजीविका के साथ बेटियों की शिक्षा जारी रखना था। इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष सक्षम योजना की जानकारी मिली।
इंदु लता ने योजना अंतर्गत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि में अपनी ओर से भी पैसे मिलाकर उन्होंने दो भैंसें खरीदीं और डेयरी व्यवसाय शुरू किया। वर्तमान में दोनों भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध उत्पादन से मिलने वाली आय के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
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मां की मेहनत रंग लाई
इंदु लता के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि उनकी बेटियों की शिक्षा है। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने बेटियों की पढ़ाई नहीं रुकने दी। डेयरी व्यवसाय से आर्थिक सहारा मिलने के बाद उन्होंने अपनी एक बेटी का मेडिकल कॉलेज में प्रवेश कराया।
दूसरी बेटी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है। इंदु लता बताती हैं कि एक समय उन्हें बेटियों की पढ़ाई और परिवार के भविष्य को लेकर बहुत चिंता होती थी। आज बेटियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करते देखकर उन्हें खुशी और संतोष मिलता है।