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अंबिकापुर के संजय पार्क में बनेगा अत्याधुनिक ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर, घायल वन्यजीवों को मिलेगा जीवनदान

छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड ने अंबिकापुर के संजय पार्क में आधुनिक ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर को मंजूरी दी। यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष में घायल वन्यप्राण...और पढ़ें

By Asim Sen GuptaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 07:55:11 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 07:55:11 PM (IST)
अंबिकापुर के संजय पार्क में बनेगा अत्याधुनिक ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर, घायल वन्यजीवों को मिलेगा जीवनदान
संजय पार्क अंबिकापुर का मुख्य प्रवेश द्वार (फाइल फोटो)

HighLights

  1. संजय पार्क में ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर को मिली आधिकारिक मंजूरी।
  2. घायल वन्यजीवों का त्वरित बचाव और प्राथमिक उपचार होगा।
  3. हिरणों की मौत के बाद भेजा गया था प्रस्ताव शासन को।

नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण और वनांचल के ग्रामीणों की सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। वन मंत्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की पहली बैठक हुई। इसमें अंबिकापुर के संजय पार्क में आधुनिक वन्यजीव ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित करने को मंजूरी दी गई।

अंबिकापुर में प्रस्तावित उपचार केंद्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष और दुर्घटनाओं में घायल वन्यप्राणियों के त्वरित बचाव, प्राथमिक उपचार और अल्पकालिक देखरेख की सुविधा उपलब्ध होगी। इसकी आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। संजय पार्क में यह सुविधा पहले से ही थी लेकिन कुछ महीनों पहले जब आवारा कुत्तों ने पार्क के बाड़े में घुसकर हिरण प्रजाति के वन्यजीवों पर आक्रमण किया था तो कई हिरण और चीतल की मौत हो गई थी।


उस दौरान स्पष्ट हुआ था कि इस सेंटर के लिए विधिवत अनुमति नहीं ली गई थी। यह नियमविरुद्ध तरीके से संचालित हो रहा था। उस घटना के बाद ही स्थानीय स्तर से प्रस्ताव शासन को भेजा गया था जिसे वन्य जीव बोर्ड की स्थायी समिति की बैठक में स्वीकृति दे दी गई है। इससे वन विभाग का कामकाज और आसान हो सकेगा।

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अधोसंरचना विकास पर नहीं करना पड़ेगा खर्च

संजय पार्क में ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर के लिए अधोसंरचना विकास पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ेगा। यहां हिरण प्रजाति के वन्य जीवों का अलग से बाड़ा बनाया गया है। राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी अलग से व्यवस्था है। शेड और बाड़े की व्यवस्था है।

वन्य जीवों को रखने के लिए केज भी है। ऐसे में वन्य जीव विशेषज्ञों की पदस्थापना और जरूरत के हिसाब से कुछ सामग्रियां खरीद कर इस केंद्र को संचालित किया जा सकेगा।

सरगुजांचल में आए दिन आबादी क्षेत्र में घुसकर हिरण प्रजाति के वन्य जीव घायल होते हैं उनका त्वरित उपचार हो सकेगा। इसी के लिए पहले से यहां व्यवस्था की गई थी हालांकि अनुमति नहीं मिली थी। अब नियमों के तहत यह संचालित हो सकेगा।

ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर इसलिए है उपयोगी

  • रेस्क्यू के बाद पहला उपचार : जब किसी घायल, बीमार या मानव बस्ती में घुस आए वन्य जीव को पकड़ा जाता है, तो उसे तुरंत जंगल में नहीं छोड़ा जाता। पहले इस सेंटर में लाकर प्राथमिक उपचार, चोट का इलाज, पानी-भोजन दिया जाता है।
  • क्वारंटाइन के लिए : वन्यजीव में कोई संक्रामक बीमारी तो नहीं है, यह देखने के लिए कुछ दिन अलग रखा जाता है ताकि वह बीमारी पूरे जंगल के वन्यजीवों में न फैले।
  • जंगल के लिए तैयार करना : पिंजरे में रहने से वन्यजीव, इंसानों का आदी हो जाता है। यहां उसे फिर से जंगल के माहौल में रहने बनाया जाता है।
  • एक जगह से दूसरी जगह भेजने से पहले का ठहराव : जैसे अंबिकापुर में पकड़ा गया कोई वन्यजीव जिसे अचानकमार या जंगल सफारी रायपुर भेजना है, तो उसे लंबी यात्रा से पहले यहीं रखा जाएगा इसलिए इसे ट्रांजिट यानी रास्ते का ठहराव केंद्र भी कहा जाता है।
  • घायल वन्यजीवों के लिए अस्थायी अस्पताल और जंगल में वापस भेजने से पहले का सुरक्षित ठहराव स्थल के रूप में।