बिलासपुर में 63.73 लाख का फर्जी लोन, 1 लोन के नाम पर 6 बैंकों से कर्ज, चोलामंडलम, एक्सिस और आदित्य बिड़ला से लोन मंजूर
एक लोन का झांसा देकर महिला के नाम पर 6 बैंकों से 63.73 लाख के कई ऋण मंजूर कराने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत दी। जस्टिस अमितेंद्र कि...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 05:19:35 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 05:19:35 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- एक लोन के नाम पर छह बैंकों से 63.73 लाख का कर्ज।
- OTP और दस्तावेज का दुरुपयोग कर रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर।
- हाईकोर्ट ने वसूली पर रोक लगाई, बैंकों से मांगा जवाब।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: एक कर्ज दिलाने का भरोसा देकर महिला के नाम पर अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों से 63.73 लाख रुपये के कई ऋण मंजूर कराने तथा बाद में रकम दूसरी जगह हस्तांतरित कराने के आरोपों पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत दी है।
न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने संबंधित बैंकों को अगली सुनवाई तक महिला के खिलाफ वसूली के लिए किसी भी तरह की दबावपूर्ण कार्रवाई करने से रोक दिया है। यह रोक बैंक कर्मचारियों और वसूली एजेंटों पर भी लागू होगी।
याचिकाकर्ता सोना सिंह की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2024 में आरवी ग्रुप और स्पैश एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े प्रतिनिधियों ने उन्हें व्यक्तिगत ऋण दिलाने का प्रस्ताव दिया था। आरोप है कि एक ऋण दिलाने की बात कहकर उनके नाम पर चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी, एक्सिस बैंक और आदित्य बिड़ला कैपिटल सहित अलग-अलग वित्तीय संस्थानों से कुल 63.73 लाख रुपये के कई ऋण मंजूर करा दिए गए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना व्यक्तिगत दस्तावेजों तथा ओटीपी का इस्तेमाल कर ऋण की प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने संबंधित बैंकों और वित्तीय संस्थानों में स्वयं जाकर ऋण के लिए आवेदन भी नहीं किया था।
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याचिकाकर्ता के अनुसार, ऋण की रकम उनके बचत खाते में जमा होने के बाद आरवी ग्रुप और स्पैश एडवाइजर्स से जुड़े प्रतिनिधियों ने सुरक्षा राशि बताकर उसमें से बड़ी रकम अपने या कंपनी से जुड़े खातों में हस्तांतरित करा ली। उन्हें भरोसा दिया गया था कि ऋण की मासिक किस्तें संबंधित प्रतिनिधि नियमित रूप से जमा करेंगे।
याचिकाकर्ता के खाते में इन लेनदेन के तहत लगभग 62.38 लाख रुपये जमा होने का उल्लेख किया गया है। उनका दावा है कि उन्होंने इस रकम का इस्तेमाल अपने निजी लाभ के लिए नहीं किया। अधिवक्ता ने भारतीय रिजर्व बैंक के तीन नवंबर 2006 के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि बैंक अपनी सेवाओं से जुड़ी गतिविधियां बाहरी एजेंटों से कराते हैं, तब भी उनकी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।
याचिकाकर्ता ने बैंक अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने और वसूली एजेंटों द्वारा लगातार परेशान किए जाने की बात भी कही।
बैंकों से दो सप्ताह में जवाब मांगा
हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत के आवेदन पर सुनवाई करते हुए बैंकों और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। साथ ही अगली सुनवाई तक संबंधित बैंकों को याचिकाकर्ता के खिलाफ वसूली के लिए कोई दबावपूर्ण कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।