कुत्ता काटने के पांच माह बाद युवक की मौत, एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगवाने से बिगड़ी तबीयत
शनिवार को अचानक हालत ज्यादा बिगड़ गई। उसे तेज बुखार आया और फिर उल्टियां शुरू हो गईं। हालत गंभीर होने पर स्वजन उसे जिला अस्पताल बलरामपुर लेकर पहुंचे।
Publish Date: Mon, 16 Mar 2026 08:01:24 PM (IST)Updated Date: Mon, 16 Mar 2026 08:12:08 PM (IST)
कुत्ते के काटने से युवक की मौत।HighLights
- गांव में कुत्ते के काटने के बाद उसने चिकित्सकीय उपचार नहीं कराया
- जागरूकता के अभाव में वह जड़ी-बूटी के भरोसे इलाज कराता रहा।
- पीडि़त के परिवार के एक-दो सदस्यों को ही इस बात की जानकारी थी।
नईदुनिया प्रतिनिधि,अंबिकापुर। बलरामपुर जिले के ग्राम महाराजगंज निवासी रामजीत राम (35) की कुत्ता काटने के करीब पांच माह बाद मौत हो गई। गांव में कुत्ते के काटने के बाद उसने चिकित्सकीय उपचार नहीं कराया और जड़ी-बूटी के भरोसे इलाज कराता रहा। परिवार के एक-दो सदस्यों को ही इस बात की जानकारी थी।
रामजीत राम को लगभग पांच माह पहले गांव की गली में एक कुत्ते ने काट लिया था। कुत्ते के काटने के बाद सामान्य तौर पर तत्काल घाव की साफ-सफाई, चिकित्सकीय जांच और एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाना जरूरी माना जाता है, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। वह जड़ी-बूटी से इलाज कराता रहा।
इस कारण संक्रमण का खतरा बना रहा और स्थिति गंभीर होती चली गई। परिवार के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से उसकी तबीयत खराब चल रही थी। शनिवार को अचानक हालत ज्यादा बिगड़ गई। उसे तेज बुखार आया और फिर उल्टियां शुरू हो गईं। हालत गंभीर होने पर स्वजन उसे जिला अस्पताल बलरामपुर लेकर पहुंचे।
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- वहां चिकित्सकों ने प्रारंभिक उपचार किया। जांच-पड़ताल और पूर्व में कुत्ता काटने की जानकारी मिलने पर चिकित्सकों ने उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल रिफर कर दिया।
- रविवार को स्वजन उसे लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे, जहां उसकी मौत हो गई। यह घटना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि कुत्ता, बंदर या अन्य संक्रमित जानवर के काटने के मामले में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
- चिकित्सकों के अनुसार कुत्ता काटने के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन समय पर लगवाना बेहद जरूरी होता है। केवल घरेलू उपचार, झाड़-फूंक या जड़ी-बूटी के भरोसे रहना खतरनाक हो सकता है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग कुत्ता काटने की घटना को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं या फिर पारंपरिक उपचार का सहारा लेते हैं।
- स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मामलों में गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि लोग समझ सकें कि कुत्ता काटने के बाद देरी नहीं, बल्कि तत्काल अस्पताल पहुंचना ही जीवन बचाने का सबसे सुरक्षित उपाय है।