अनुकंपा नियुक्ति में गड़बड़ी: शपथपत्र में छुपाई सरकारी नौकरी की जानकारी,लिपिक निलंबित
अंबिकापुर में गलत शपथपत्र देकर अनुकंपा नियुक्ति हासिल करने वाली लिपिक सीमा कुशवाहा को डीईओ ने निलंबित कर दिया है। जांच में सामने आया कि उनके भाई और पत...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 09:06:07 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 09:06:07 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- शपथपत्र में नौकरी की जानकारी छिपाने पर सहायक ग्रेड-3 सीमा कुशवाहा निलंबित।
- मैनपाट निवासी की शिकायत पर डीईओ द्वारा गठित समिति ने की मामले की पुष्टि।
- छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम के उल्लंघन पर होगी नियमित विभागीय जांच।
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर: अनुकंपा नियुक्ति में गलत शपथपत्र देकर नौकरी लेने का मामला सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी डा दिनेश कुमार झा ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बतौली में पदस्थ सहायक ग्रेड तीन सीमा कुशवाहा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।स्व. चंद्रिका प्रसाद कुशवाहा की पुत्री सीमा कुशवाहा को पिता की मृत्यु 23 फरवरी 2017 के बाद 16 जून 2017 को अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी।
नियुक्ति के समय सीमा ने पांच मई 2017 को शपथपत्र दिया था कि उनके परिवार में कोई भी सदस्य शासकीय,अर्धशासकीय सेवा में नहीं है।विकासखंड मैनपाट के राजेश कुमार यादव की शिकायत 22 जुलाई 2026 पर डीईओ ने सात अगस्त 2026 को जांच समिति गठित की। समिति ने मूल अभिलेख, आवेदन, शपथपत्र, पारिवारिक विवरण और सेवा अभिलेखों का परीक्षण किया तो गड़बड़ी सामने आई।
जांच में पाया गया कि सीमा कुशवाहा के भाई राकेश कुशवाहा वर्ष 2013 से और पति सुदामा कुशवाहा वर्ष 2010 से ही शासकीय सेवा में कार्यरत हैं। यह तथ्य शपथपत्र में छुपाया गया। यह छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग के के प्रविधानों का स्पष्ट उल्लंघन है, क्योंकि अनुकंपा नियुक्ति तभी मिलती है जब परिवार में कोई सरकारी सेवक न हो।
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डीईओ डा दिनेश कुमार झा ने आदेश जारी कर कहा कि यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम के विपरीत है और गंभीर प्रकृति का है। इसी के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
निलंबन अवधि में मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी अंबिकापुर निर्धारित किया गया है। बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
नियम के तहत नियमित विभागीय जांच होगी, पृथक से आरोप पत्र जारी होगा।
यह निलंबन दंड नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच के लिए अंतरिम उपाय है।
अनुकंपा नियुक्ति की वैधता पर अंतिम निर्णय विभागीय जांच के बाद लिया जाएगा।