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अंबिकापुर फर्नीचर घोटाला: 10 आरोपितों पर 20 हजार पन्नों का चालान पेश

अविभाजित सरगुजा जिले के 2010-11 के राजीव गांधी शिक्षा मिशन फर्नीचर घोटाले में EOW-एंटी करप्शन ब्यूरो ने 10 आरोपितों के खिलाफ 20 हजार पन्नों का चालान प...और पढ़ें

By Manoj Kumar TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 08:27:09 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 08:27:09 PM (IST)
अंबिकापुर फर्नीचर घोटाला: 10 आरोपितों पर 20 हजार पन्नों का चालान पेश
न्यायालय में प्रस्तुत चालान के दस्तावेज

HighLights

  1. फर्नीचर घोटाले में 20 हजार पन्नों का चालान पेश।
  2. बिना आपूर्ति 2.68 करोड़ के चेक बांटे, 67.48 लाख का गबन।
  3. फर्जी फर्म बनाकर 22 लाख हड़पे, DMC ने लिया कमीशन।

नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर : अविभाजित सरगुजा जिले के बहुचर्चित राजीव गांधी शिक्षा मिशन फर्नीचर घोटाले में कार्रवाई हुई है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो , एंटी करप्शन ने वर्ष 2010-11 के घोटाले में लगभग 20,000 पन्नों का चालान विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अंबिकापुर में प्रस्तुत किया है। चालान में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक,सप्लायरों को आरोपित बनाया गया है।

कुल 10 आरोपितों के विरुद्ध अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया है। जांच में शासन को कुल 67 लाख 48 हजार आठ रुपये की आर्थिक क्षति होना पाया गया है।

वर्ष 2010-11 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत अविभाजित सरगुजा जिले के मिडिल स्कूलों में फर्नीचर खरीदी के लिए 2.70 करोड़ का आबंटन आया था। तब बलरामपुर और सूरजपुर जिले नहीं बने थे। जिला कार्यालय राजीव गांधी शिक्षा मिशन अंबिकापुर ने तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक के अनुमोदन से सीएसआइडीसी की दरों पर 10 फर्मों को क्रय आदेश दिए और 28 मार्च 2011 को कुल दो करोड़ 68 लाख 18 हजार 838 रुपये के चेक जारी कर दिए। 20 दिन में सामग्री आपूर्ति करने की शर्तों का पालन नहीं किया गया था।


भौतिक सत्यापन से पहले ही बांट दिए चेक

सरगुजा के तत्कालीन कलेक्टर ने निर्देश दिया था कि भौतिक सत्यापन के बाद ही चेक दिए जाएं, लेकिन तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक एसपी पाण्डेय ने लेखापाल प्रवीण सिन्हा से चेक लेकर छह अप्रैल 2011 से नौ अप्रैल 2011 के बीच बिना आपूर्ति के ही सभी फर्मों को बांट दिए। जांच समिति ने इसे पद का दुरुपयोग और गबन की मंशा माना।भण्डार क्रय नियमों की पूरी तरह अनदेखी की गई।

न गुणवत्ता जांच हुई, न क्रय समिति से सत्यापन, न फर्मों से अनुबंध, न तीन प्रतिशत सुरक्षा निधि ली गई। फर्मों ने स्कूलवार आपूर्ति सूची और प्रधान पाठकों की पावती तक नहीं दी, फिर भी भुगतान कर दिया गया।

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फर्जी फर्म बनाकर 22 लाख का गबन

विवेचना में सबसे बड़ा राजफाश बदर्शन फेब्रिकेशन के नाम पर हुआ। तत्कालीन डीएमसी एसपी पाण्डेय ने 18 फरवरी 2011 को दर्शन फेब्रिकेटर रायपुर के संचालक सुरेश कटारिया के नाम जारी क्रय आदेश आकृति प्रिंटिंग प्रेस अंबिकापुर के संचालक संजय पटेल को दे दिया और उसी नाम से बैंक खाता खोलने को कहा।

संजय पटेल ने ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स अंबिकापुर में खाता खोलकर 22 लाख 91 हजार 909 रुपये का चेक जमा कर राशि निकाल ली। पूछताछ में संजय ने बताया कि उसने सात लाख रुपये कमीशन के रूप में एसपी पाण्डेय को दिए थे। इस फर्म ने एक भी स्कूल में फर्नीचर नहीं दिया।

बिना फर्नीचर आपूर्ति के 11 लाख का भुगतान

इसी तरह महारानी स्टील एंड अप्लायंस रायपुर के संचालक प्रेमचन्द जैन ने 11 लाख 44 हजार 349 रुपये लेकर एक भी फर्नीचर नहीं दिया। इनसे भी मोटी कमीशन लेकर चेक दे दिया गया था। प्रेमचन्द जैन की मृत्यु सात अगस्त 2025 को हो चुकी है। शेष आठ फर्मों ने आदेश से कम फर्नीचर दिया।

जब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और एंटी करप्शन ब्यूरो को जांच की जिम्मेदारी दी गई तो उन्होंने जिन स्कूलों को फर्नीचर सप्लाई की गई थी वहां के दस्तावेज चेक किए में कई प्रधान पाठकों के पास फर्नीचर आपूर्ति का कोई दस्तावेज नहीं था। स्कूलों में भी रिकॉर्ड नहीं मिला। बिना सामग्री आपूर्ति के ही राशि का बंदरबांट कर लेने की पुष्टि हुई।

ऐसे पुष्टि हुई 67.48 लाख के गबन की

आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो तथा एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में 67.48 लख रुपए के शासकीय राशि के गबन की पुष्टि हुई है।फर्मवार गणना में आपूर्ति नहीं किए गए फर्नीचर की राशि 56 लाख 84 हजार 848 रुपये, वैट नौ लाख 47 हजार 938 रुपये और निरीक्षण शुल्क एक लाख 15 हजार 222 रुपये सहित कुल 67 लाख 48 हजार आठ रुपये का गबन पाया गया।

इन 10 आरोपितों के विरुद्ध प्रस्तुत हुआ चालान

चालान में तत्कालीन डीएमसी (वर्तमान में सेवानिवृत्त) सत्यप्रकाश पाण्डेय, दर्शन फेब्रिकेशन के संचालक संजय पटेल, अंबिका अलमीरा के अजय कुमार अग्रवाल, सेलेनो स्टील की ममता अग्रवाल, महामाया फेब्रिकेटर्स के बिधी सिंह कटलारिया, सूर्या स्टील के राजकुमार बंसल, श्री साई इंडस्ट्रीज के संदीप तिवारी, श्याम मेटल के हितेश कुमार अग्रवाल, श्री श्याम इंडस्ट्रीज के रितेश कुमार अग्रवाल और पंकज फर्नीचर मार्ट के संजीव गुप्ता आरोपित हैं।

तत्कालीन डीएमसी व सप्लायर हुए थे गिरफ्तार

एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि तत्कालीन डीएमसी एसपी पाण्डेय और संजय पटेल को कई बार नोटिस के बाद भी सहयोग नहीं करने पर 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर 24 अगस्त तक रिमांड पर लिया गया था। चालान में प्रधान पाठकों के प्रमाणपत्र, खरीदी-भुगतान के अभिलेख और फर्जी फर्म से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि एसपी पांडे को हाई कोर्ट से जमानत मिली है जबकि संजय पटेल अभी भी जेल में निरुद्ध हैं। इस प्रकरण के शेष आरोपितों द्वारा अग्रिम जमानत ले लिए जाने की खबर है।