
नईदुनिया प्रतिनिधि,अंबिकापुर : सरगुजा जिले के उदयपुर वन परिक्षेत्र में 26 हाथियों का दल पिछले 20 दिनों से अधिक समय से डेरा जमाए हुए है। हाथियों ने कई एकड़ में लगी धान की फसल सहित अन्य फसलों को रौंदकर भारी नुकसान पहुंचाया है। उदयपुर से लगे करमकठरा जंगल से लेकर लक्ष्मणगढ़ तक करीब 10 किलोमीटर के दायरे में शाम ढलते ही हाथी जंगल से बाहर निकल आते हैं, जिससे पूरे इलाके में भय का माहौल है।
उदयपुर से केदमा जाने वाले मुख्य मार्ग पर भी हाथियों का लगातार आवागमन हो रहा है। झुंड में बच्चे भी शामिल हैं, इसलिए हाथियों का मूवमेंट कम है और वे इसी जंगल से घिरे इलाके में टिके हुए हैं। खेतों में फसल होने और जंगल में चारा-पानी की पर्याप्त उपलब्धता के कारण हाथी यहां से जाने को तैयार नहीं हैं।
वन विभाग के अनुसार शाम ढलते ही हाथी छोटे-छोटे समूहों में बंटकर खेतों में घुस जाते हैं। फसलों को खाकर और पैरों से कुचलकर नुकसान पहुंचाते हैं और सुबह सूर्योदय से पहले फिर एक जगह एकत्र होकर जंगल में चले जाते हैं। पिछले दिनों इसी क्षेत्र में विचरण के दौरान एक हाथी के बच्चे की मौत भी हो गई थी। पिछले कई दिनों से यह दल ग्राम रामनगर में किसानों की फसलों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहा है।
यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़: किराएदारों की जानकारी थाने में देना अनिवार्य, विवरण नहीं देने पर मकान मालिक पर दर्ज होगी एफआईआर
हाथियों के सड़क पार करने के दौरान उदयपुर-केदमा मार्ग को कई बार बंद करना पड़ रहा है। वन विभाग ने अलग-अलग टीम बनाकर हाथियों की निगरानी शुरू की है, लेकिन फसल नुकसान रोकने में सफलता नहीं मिल रही है।
हाथियों के भय से रामनगर और आसपास के गांवों के लोग शाम होने से पहले घरों में पहुंचना चाहते हैं। फसलों को बचाने के लिए किसान रातभर जागकर रखवाली करने को मजबूर हैं। लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है।