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65 साल पहले रह गए थे अरमान अधूरे, 82 साल उम्र में फिर से निकली बारात; हाथ में लाठी लेकर डाली वरमाला

अंबिकापुर में एक अनोखी शादी देखने के लिए मिली है, जहां 82 साल के दुल्हे ने 77 साल की दुल्हन के गले में वरमाला डाली है। दंपती के बच्चों ने मिलकर माता-प...और पढ़ें

By Asim Sen GuptaEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Tue, 04 Nov 2025 05:25:42 PM (IST)Updated Date: Tue, 04 Nov 2025 05:40:39 PM (IST)
65 साल पहले रह गए थे अरमान अधूरे, 82 साल उम्र में फिर से निकली बारात; हाथ में लाठी लेकर डाली वरमाला
65 साल बाद फिर से रचाई शादी

नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर: शहर में एक ऐसी शादी हुई हुई है, जिसकी चर्चा हर तरफ लोगों में हो रही है। इस शादी में दुल्हा 82 साल के और दुल्हन 77 साल की है। परपोता सहबाला बना है।

दरअसल, शहर के एक बुजुर्ग दंपती ने अपने शादी की 65वीं वर्षगांठ पर फिर से शादी रचाई, वो भी इस बार पूरे रस्म-रिवाजों के साथ। इसमें करीब 82 साल के दूल्हे और करीब 77 साल की दुल्हन ने हाथों में लाठी लेकर एक दूसरे को वरमाला पहनाई।

82 साल के पति और 77 साल की पत्नी ने शादी की 65वीं सालगिरह पर फिर से रचाई शादी। धूम-धाम से निकली बारात। pic.twitter.com/8otHPZ1G49

— NaiDunia (@Nai_Dunia) November 4, 2025

शहर में सोमवार को एक अनोखा और भावनाओं से भरा आयोजन देखने को मिला, जब बुजुर्ग दंपती बलदेव प्रसाद सोनी और उनकी धर्मपत्नी बेचनी देवी ने अपने 65वें वैवाहिक वर्षगांठ को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ धूमधाम से मनाया।


निभाए गए रस्म

कार्यक्रम की शुरुआत हल्दी रस्म से हुई, जिसमें स्वजन और रिश्तेदारों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसके बाद दूसरे दिन बरात भी निकाली गई, इसमें ढोल नगाड़े की धुन पर रिश्तेदार और स्थानीय लोग जमकर नाचे। दूल्हा बने बलदेव प्रसाद सोनी ने पारंपरिक पोशाक पहनकर सबका दिल जीत लिया, वहीं दुल्हन बनीं बेचनी देवी ने मुस्कुराते हुए फिर से सात फेरे लेने की यादें ताजा कर दी।

परिवार के सदस्यों ने बताया कि यह आयोजन नई पीढ़ी को संस्कार और रिश्तों की अहमियत से परिचित कराने के उद्देश्य से किया गया था। पूरे कार्यक्रम में आनंद और भावनाओं का माहौल बना रहा। खास बात ये की स्थानीय लोगों ने भी इस अनूठे आयोजन की जमकर सराहना करते हुए कहा कि यह शादी नहीं, बल्कि “समर्पण और प्रेम की मिसाल” है।

दो बेटों और दोनो बेटियों ने उठाया बीड़ा

बलदेव प्रसाद सोनी ब्रम्हरोड के रहने वाले है जिनके बड़े बेटे दिनेश और छोटे बेटे विनोद के साथ दो बेटियां मंजू और अंजू है।इनका कहना है कि जब वे बड़े हुए तो उनके माता पिता अक्सर ये बात कहते थे कि उनकी शादी कम उम्र में कर दी और आर्थिक संपन्नता न होने के कारण उनके शादी के शौक पूरे नहीं हो सके।

यही कारण था कि चारो ने एक साथ मिलकर अपने माता पिता के शादी के सालगिरह का आयोजन किया, जिसके लिए बाकायदा सभी रस्मे निभाई गई। हल्दी और मंडप के साथ घर से बाकायदा बारात निकाली गई और एक बड़े होटल में वैवाहिक कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। इस आयोजन में बहुओं बसंती और उर्मिला के साथ दोनो दामाद शिवशंकर और अशोक ने भी खूब सहयोग किया।

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18 साल का परपोता बना सारथी

आम तौर पर ऐसा सौभाग्य कम ही मिल पाता है कि कोई अपने परपोता के साथ इतना लंबा जीवन जी सके मगर बलदेव और बेचनी अभी एक दम स्वस्थ है। अपने परपोते जो कि खुद भी 18 साल का हो गया है के साथ जीवन का आनंद ले रहे है। इस आयोजन में खास बात ये रही कि बलदेव और बेचनी के बरात में उनका परपोता तनिष्क सर्राफ सारथी बनकर गाड़ी मे बैठाकार परदादा दूल्हा और परदादी दुल्हन को लेकर गया।