
नईदुनिया प्रतिनिधि,अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ शासन के सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस दो अक्टूबर को केंद्रीय जेल अंबिकापुर में प्रदेश की पहली परिवार खुली जेल (फैमिली ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन) का शुभारंभ किया गया। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के करकमलों से इस अनूठे और मानवीय प्रयोग की शुरुआत की गई।
यह एक यूनिक कांसेप्ट है, जिसमें अंबिकापुर जेल में उपलब्ध अधोसंरचना का उपयोग करते हुए खुली जेल तैयार किया गया है। इस खुली जेल में प्रारंभिक चरण में दो बंदी अपने परिवार के साथ रहेंगे। ये बंदी सुबह विभिन्न कार्य करने के लिए जेल के बाहर निकलेंगे और शाम को लॉकअप के पूर्व वापस जेल में आ जाएंगे। बंदी अपने परिवार को अपने साथ रख सकेंगे। सभी मूलभूत सुविधाएं जेल विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी।
जेल प्रशासन के अनुसार परिवार को प्रथम माह का राशन विभाग द्वारा दिया जाएगा। इसके बाद बंदी को स्वयं रोजगार कर राशन की व्यवस्था करनी होगी। इसके लिए जेल विभाग द्वारा पर्याप्त अवसर और रोजगार के वैकल्पिक साधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। भविष्य में इस सुविधा के आकार और स्वरूप को और बढ़ाया जाएगा।
जेल विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ हर कैदी को नहीं मिलेगा। गंभीर धाराओं के कैदी इसमें शामिल नहीं होंगे। केवल वही कैदी पात्र होंगे, जिनका जेल में निरुद्ध रहने के दौरान आचरण पूरी तरह साफ-सुथरा रहा हो और जो किसी भी अनुशासनहीनता या घटना में शामिल न रहे हों। अभी इसकी शुरुआत की गई है। इसमें रहने वाले बंदियों के चयन के लिए सूची तैयार कर मुख्यालय भेजी जाएगी और मुख्यालय के अनुमोदन के बाद ही अंतिम चयन किया जाएगा।
इस व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह जरूरी नहीं है कि कैदी और उसकी पत्नी दोनों जेल में निरुद्ध हों। बाहर रहने वाली पत्नी भी इस फैमिली ओपन जेल में अपने कैदी पति के साथ रह सकेगी। इससे परिवार टूटने से बचेगा और बंदी के सुधार और पुनर्वास में मदद मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय कारागार अंबिकापुर में सरगुजा स्कूल ऑफ आर्ट्स संचालित है। यहां बंदियों द्वारा कला का प्रशिक्षण लिया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान बंदियों द्वारा तैयार किया गया डीजी जेल हिमांशु गुप्ता का आकर्षक पोर्ट्रेट उन्हें भेंट किया गया। बंदियों द्वारा बनाई गई यह कलाकृति काफी सराही गई।कार्यक्रम में जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत सहित जेल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने इसे सुधारात्मक व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
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