
अंबिकापुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हायर सेकंडरी तक की पढ़ाई की है। इसके आगे की पढ़ाई भी विष्णुदेव साय कर सकते थे लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी नहीं रखी। वे गांव वापस लौट आए। खेती-बाड़ी की जिम्मेदारी संभाली। इस कार्य में वे इतना रम गए कि घर,परिवार और समाज ही उनके लिए सब कुछ हो गया था लेकिन जीवन में अचानक बदलाव आया। भाजपा के कद्दावर नेता स्व दिलीप सिंह जूदेव के सानिध्य में राजनीति का क़कहरा सीखने वाले विष्णुदेव साय आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं। साय के मुख्यमंत्री बनने से उत्तर छत्तीसगढ़ में हर्ष का माहौल है।
सरगुजा संभाग का हर आम व खास नए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सहज, सरल अंदाज से अच्छी तरह से वाकिफ है। जशपुर जिले के उनके गृह ग्राम बगिया में तो मानो बहार आ गई है। चार पहिया वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है। लोग उनके घर पहुंच रहे हैं। परिवार के सदस्यों को इस गौरवपूर्व उपलब्धि के लिए बधाई दे रहे हैं। इन्हीं व्यस्तताओं के बीच हमने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के स्वजन,दोस्त और परिचितों से चर्चा की। यह बात निकलकर सामने आई कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जीवन भी संघर्षों का जीवंत उदाहरण है। संघर्षों ,चुनौतियों से लड़ते हुए वे आगे बढ़े और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संघर्ष में तप कर अपना और परिवार का जीवन संवारा है।चौथी कक्षा मे पढ़ाई के दौरान ही पिता राम प्रसाद साय का निधन हो गया था।
मां जसमनी देवी और दो छोटे भाई ओम प्रकाश साय, विनोद साय के साथ परिवार के समक्ष परेशानियां खड़ी हो गई थी। परिवार के पास जमीन तो खेती करने के लिए थी, लेकिन खेती की देख रेख करने के लिए कोई नहीं था।आर्थिक संकट से जूझते हुए गृहग्राम बगिया के प्राथमिक स्कूल से कक्षा पांचवीं तक की पढ़ाई पूरी की और मिडिल स्कूल की पढ़ाई के लिए कुनकुरी चले गए। यहां जशपुर रोड मे चर्च के पास प्रकाश कुजूर के कच्चे मकान के एक छोटे से कमरे मे रह कर 11 वीं की पढ़ाई पूरी की। खेती बाड़ी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने हायर सेकंडरी के आगे पढ़ाई नहीं की। मकान मालिक प्रकाश कुजूर ने बताया कि विष्णुदेव साय, छात्र जीवन से ही बड़े शांत और मिलनसार स्वभाव के थे।पढ़ाई के साथ - साथ खेलकूद में भी काफी सक्रिय रहा करते थे।
जिनके साथ पढ़ाई की आज वे स्कूल के प्राचार्य
कुनकुरी के लोयोला स्कूल के प्राचार्य मर्यानुस केरकेट्टा ने बताया कि विष्णु देव साय 1975 से 81 तक पढ़ाई किये थे। उन्होंने बताया कि साय विज्ञान संकाय के छात्र थे और पढ़ाई मे हमेशा अव्वल रहते थे। उनके साथ के सहपाठियों ने बताया था कि विष्णुदेव साय बेहद गंभीर और पढ़ाई के प्रति सजग रहने वाले आदर्श विद्यार्थी के रूप में खुद को स्थापित कर चुके थे। उन्होंने बताया कि ज़ब विष्णु देव साय लोयोला स्कूल के छात्र थे, उस समय वे भी इसी संस्था मे छात्र हुआ करते करते थे।विष्णु देव साय उनके जूनियर थे। पढ़ाई करने के बाद 2009 में वे पढ़ाई पूरा करने के बाद स्कूल के प्राचार्य बने।
बगिया निवासी और विष्णु देव साय के बचपन के साथी अनिल तिवारी ने बताया कि पिता राम प्रसाद साय के निधन के बाद, विष्णुदेव साय का बचपन बेहद संघर्षमय हो गया था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें हाई स्कूल के बाद पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ी ताकि छोटे भाइयो का भविष्य संवार सके।पढ़ाई छोड़ कर विष्णु देव साय ने खेती की किसानी की जिम्मेदारी सम्हाली। फिर वे राजनीति में आए। हमें खुशी है कि विष्णुदेव साय आज हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।