
नईदुनिया प्रतिनिधि,अंबिकापुर: एक सरकारी स्कूल का प्रधान पाठक हत्या के प्रयास के मामले में दोषसिद्ध होने के बाद करीब नौ महीने तक जेल में बंद रहा, लेकिन शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। न तो विद्यालय के संचालन की नियमित निगरानी हुई और न ही प्रधान पाठक की लंबे समय तक अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया गया।
मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा ने संबंधित प्रधान पाठक को पहले निलंबित किया और फिर सेवा से बर्खास्त कर दिया। अब इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी और वर्तमान में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के जिला शिक्षा अधिकारी रविकांत यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए रविकांत यादव के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है। इस संबंध में उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर तत्कालीन बीईओ के कार्यकाल में बरती गई लापरवाही और पर्यवेक्षण संबंधी खामियों का उल्लेख किया है। कलेक्टर की इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है।
मामला उदयपुर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला पेंडरखी में पदस्थ प्रधान पाठक विजय कुमार यादव से जुड़ा है। उसके विरुद्ध मणिपुर थाना क्षेत्र में भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज था। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश, अंबिकापुर ने सत्र प्रकरण क्रमांक 97/2019 में तीन जनवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए उसे धारा 148, धारा 323/149 के चार प्रकरणों तथा धारा 307/149 के तहत दोषसिद्ध ठहराया।
न्यायालय ने अधिकतम पांच वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया था।न्यायालय के फैसले के बाद विजय कुमार यादव तीन जनवरी से नौ अक्टूबर 2026 तक केंद्रीय जेल अंबिकापुर में निरुद्ध रहा। इसके बावजूद उसकी लंबे समय तक अनुपस्थिति और जेल में रहने की जानकारी विभागीय स्तर पर उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंचने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े कर रहा है।
प्रकरण सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा ने 22 अक्टूबर 2026 को विजय कुमार यादव को सेवा से निलंबित कर दिया। इसके बाद 28 अक्टूबर 2026 को उसे सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया गया। मामले की समीक्षा के दौरान तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी रविकांत यादव की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।कलेक्टर अजीत वसंत ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि रविकांत यादव के उदयपुर बीईओ के कार्यकाल के दौरान अधीनस्थ प्रधान पाठक न्यायालय से दोषसिद्ध होकर जेल में बंद रहा, लेकिन इस संवेदनशील तथ्य से उच्चाधिकारियों और जिला प्रशासन को अवगत नहीं कराया गया। कलेक्टर ने इसे पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही माना है।
कलेक्टर अजीत वसंत

कलेक्टर ने पत्र में पर्यवेक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। विकासखंड शिक्षा अधिकारी को अपने क्षेत्र के विद्यालयों की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था की निगरानी करनी होती है। ऐसे में किसी विद्यालय का प्रधान पाठक कई महीनों तक अनुपस्थित रहे, फिर भी संबंधित अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं मिले, यह गंभीर चूक मानी गई है।पत्र के अनुसार, रविकांत यादव के कार्यकाल में संबंधित विद्यालय का भौतिक या आकस्मिक निरीक्षण नहीं किया गया।
संकुल शैक्षिक समन्वयक की बैठकों में भी प्रधान पाठक की अनुपस्थिति की समीक्षा नहीं हुई। कलेक्टर ने इन परिस्थितियों को पर्यवेक्षण में शिथिलता, कर्तव्य के प्रति उदासीनता और प्रशासनिक जवाबदेही की कमी के रूप में रेखांकित किया है।
इस पूरे मामले की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम ने कलेक्टर सरगुजा से पूरे प्रकरण की जानकारी देते हुए की थी। इस मामले को कलेक्टर ने गंभीरता से लिया और जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा को जांच के निर्देश दिए थे। सरगुजा में शिक्षा विभाग के प्रमुख अधिकारियों की लापरवाही भी इस मामले में सामने ला दी है। सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम ने संबंधित लापरवाह अधिकारियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाने की मांग की है,जिन्हें यह पता नहीं चला कि उनके विभाग का एक शिक्षक नौ माह तक जेल में है और विभाग को भनक तक नहीं थी।
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