
नईदुनिया प्रतिनिधि,अंबिकापुर: मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विकासखंड राजपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेवतपुर की स्टाफ नर्स अपूर्वा सिंह भदौरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं ने प्रकरण संज्ञान में आने के 48 घंटे के भीतर यह आदेश जारी किया।
नईदुनिया ने 22 अक्टूबर के अंक में ही रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में व्याप्त मनमानी,अव्यवस्था और स्वेच्छाचारिता को लेकर खबर का प्रकाशन किया था। रेवतपुर स्वास्थ्य केंद्र में लटका था ताला,महतारी एक्सप्रेस में कराया गया प्रसव शीर्षक से प्रकाशित खबर को कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने संज्ञान में लेते हुए कहा है कि ड्यूटी में लापरवाही स्वीकार्य नहीं की जाएगी। संबंधितों पर कार्रवाई होगी।
मालूम हो कि 20 अक्टूबर को एक गर्भवती महिला प्रसव के लिए रेवतपुर अस्पताल पहुंची थी लेकिन उस समय वहां स्टाफ उपस्थित नहीं था। महतारी एक्सप्रेस में स्वजन के साथ प्रसव पीड़ा से महिला कराह रही थी। अस्पताल में ताला और परिसर में निर्मित स्टाफ क्वार्टर में एक भी कर्मचारी के नहीं होने के कारण महतारी एक्सप्रेस में ही उसका सुरक्षित प्रसव कराया गया था।
मामला संज्ञान में आते ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने 21 अक्टूबर को खंड चिकित्सा अधिकारी राजपुर से जांच प्रतिवेदन मांगा। उसी दिन हुए निरीक्षण में पाया गया कि मॉर्निंग ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स समय पर उपस्थित नहीं थीं। प्रभारी के फोन करने पर वे अस्पताल पहुंचीं और जच्चा-बच्चा को अस्पताल में भर्ती कराया। खंड चिकित्सा अधिकारी ने ग्राम कुंदीकला की प्रसूता अनिता सिंह से स्वयं संपर्क किया।
जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।जांच में संबंधित कर्मचारी प्रथम दृष्टया कर्तव्य के प्रति लापरवाही और अनुशासनहीनता की दोषी पाई गईं। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम का उल्लंघन मानते हुए उन्हें निलंबित किया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर रहेगा। विभागीय जांच के लिए 10 दिनों के भीतर आरोप पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने दो टूक कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल की लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। यह निगरानी सीएमएचओ और बीएमओ के साथ एसडीएम तथा राजस्व अमला भी करेगा। कलेक्टर ने कहा कि जिले में कोई भी व्यक्ति स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे और आपातकालीन व मातृ-शिशु सेवाओं में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस पूरे प्रकरण में एक स्टाफ नर्स को निलंबित कर विभाग ने अपनी साख बचाने की कोशिश की है जबकि अस्पताल में तीन चिकित्सक सहित कुल 17 स्टाफ पदस्थ हैं। अस्पताल परिसर में ही आवास की भी सुविधा है। यदि अस्पताल का ताला नहीं खुला तो उसके लिए सिर्फ स्टाफ नर्स को दोषी मानना भी बड़ा सवाल है। ऐसे प्रकरणों में अक्सर देखा जाता है कि किसी कर्मचारी को निलंबित कर अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जाता है जबकि समय पर अस्पताल खुलना और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाना वरिष्ठ अधिकारियों की भी जिम्मेदारी होती है।
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