
अंबिकापुर (नईदुनिया न्यूज)। सरगुजा संभाग के चार संतों को अयोध्या में श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा उत्सव में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है। इनमें अंबिकापुर के संत महामंडलेश्वर हर केवल दास जी महाराज, संत गहिरा गुरु के सुपुत्र बब्रुवाहन महाराज , बांटीडाँड़ आश्रम के रामानंद सरस्वती तथा शंकरगढ़ जनजातीय क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ धार्मिक चेतना जगाने वाले बिगन दास जी शामिल हैं।उत्तर छत्तीसगढ़ में वर्षों से ये सेवा और जागरूकता के कार्य में लगे हुए हैं।
शिक्षा,स्वास्थ्य के साथ सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में भी इन सभी ने अपना योगदान दिया है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इन्होंने धर्म जागरण, श्री राम जन्मभूमि आंदोलन में अपना सक्रिय सहयोग दिया है। देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाले आध्यातिमक चेतना जागृति के कार्यक्रम में ये सभी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते रहें हैं। अपने अनुयायियों के माध्यम से गांव-गांव में लोगों में शिक्षा,स्वास्थ्य,स्वच्छता के साथ जनजागरण के अभियान में लगे हुए हैं। अयोध्याधाम से मिले आमंत्रण से सभी कृतज्ञ हैं। श्री रामलला के दर्शन को लेकर लोग लालायित भी है। उम्मीद है कि प्राण प्रतिष्ठा के दिन न सही लेकिन उसके पहले और बाद में सभी वहां पहुंचेंगे।
जनजातीय क्षेत्र को कर्मभूमि बनाया महामंडलेश्वर हरकेवल दास जी ने
उत्तर छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल है। इस क्षेत्र को कर्मभूमि बनाकर महामंडलेश्वर हरकेवल दास जी महाराज सेवा कार्य कर रहे हैं। उनका सरगुजा आगमन वर्ष 1965 में हुआ था जब यहां सुविधाओं की भारी कमी थी। अभावों और समस्याओं के बीच दूरस्थ बसाहटों में लोग निवास करते थे। यहां आने के बाद उन्होंने शिक्षा का अलख जगाया। सामाजिक कुरीतियों को दूर करने अभियान चलाया। हरकेवल दास जी महाराज का आश्रम अंबिकापुर के मनेन्द्रगढ़ रोड के किनारे दत्ता कालोनी के पास हैं। यहां मंदिरों की स्थापना की गई है। यहां हिंदी और अंग्रेजी माध्यम का 12 वीं तक का स्कूल, शिक्षा महाविद्यालय भी संचालित है। शिक्षा के प्रचार-प्रसार के साथ समय-समय पर ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविरों का भी आयोजन किया जाता है। वर्ष भर यहां विविध धार्मिक आयोजन भी होते हैं। धार्मिक चेतना जागृत करने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले संत हरकेवल दास जी महाराज सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय सहभागिता निभाते हैं। सामाजिक क्षेत्र में उनका सेवा कार्य वर्षों से जारी है। उदासीन पंचायती बड़ा अखाड़ा इलाहाबाद से जुड़े संत हरकेवल दास जी महाराज की अगुवाई में कुंभ मेला में रथयात्रा भी निकल चुकी है। इन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि भी मिली है। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य महामंडलेश्वर हरकेवल दास जी महाराज लगातार धर्म जागरण अभियान से भी जुड़े हुए हैं। उत्तर छत्तीसगढ़ में शिक्षा,स्वास्थ्य के साथ सामाजिक,धार्मिक गतिविधियों में उनकी अग्रणी भूमिका रहती है।
संत गहिरा गुरु के विचारों,आदर्शों को आगे बढ़ा रहे बब्रुवाहन महाराज
उत्तर छत्तीसगढ़ में सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना के अग्रदूत संत गहिरा गुरु महाराज के आदर्शों और विचारों को आगे बढ़ाने का काम उनके सुपुत्र बब्रुवाहन जी महाराज कर रहे हैं। जशपुर जिले के बगीचा ब्लाक के कैलाश गुफा और सामरबार में इनका आश्रम हैं। बलरामपुर जिले का श्रीकोट आश्रम भी सामाजिक चेतना का बड़ा केंद्र है। संत समाज से जुड़े बब्रुवाहन जी महाराज असंख्य अनुयायियों के साथ संत समाज की गतिविधियों को आगे बढाने का काम कर रहे हैं। जनजातीय क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार-प्रचार में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान है। उत्तर छत्तीसगढ़ में संस्कृत शिक्षा के लिए एकमात्र महाविद्यालय की स्थापना भी की गई है। जनजातीय समाज में शिक्षा के साथ संस्कृत को बढ़ावा देने में अग्रणी बब्रुवाहन महाराज द्वारा सात्विक जीवन तथा अध्यात्म का प्रचार प्रसार कर सामाजिक बुराइयों को दूर किया जा रहा है। सभ्यता,संस्कृति,परंपरा की रक्षा के साथ धार्मिक चेतना जागृत करने के लिए वर्ष भर संत समाज की ओर से विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। भजन-कीर्तन,पूजा-आरती,यज्ञ-हवन के साथ धार्मिक चेतना जागृत करने का कार्य अनवरत रूप से किया जा रहा है।
स्वामी विवेकानंद केंद्र में समय बिताने वाले रामानंद सरस्वती ने कोरवाओं के बीच आरंभ किया सेवा कार्य
अयोध्या में श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के लिए सरगुजा संभाग के बाटीडाँड़ आश्रम के रामानंद सरस्वती को भी आमंत्रित किया गया है। रामानंद सरस्वती जनजाति क्षेत्र में वर्षों से सेवा कार्य में लगे हुए हैं। बांटीडाँड़ आश्रम जंगल किनारे है। बारहमासी नदी के किनारे स्थित आश्रम परिसर में बिजली तो है लेकिन ज्यादातर समय बिजली बाधा रहती है। पहाड़ी कोरवा बसाहट में रामानंद सरस्वती आश्रम में निवास करते हैं। प्रतिकूल मौसम में अभावग्रस्त लोगों के बीच आध्यात्म की अलख जगाने वाले रामानंद सरस्वती ने वर्ष 1962 में अपना घर त्याग दिया था। श्रीरामकृष्ण परमहंस के अनन्य भक्त रामानंद सरस्वती ने सबसे पहले कन्याकुमारी के श्री विवेकानंद केंद्र में अपनी सेवाएं दी। यहां कई वर्षों तक श्री विवेकानंद के जीवन दर्शन के अनुरूप कार्य किया। सन्यासी के रूप में उनका जीवन यहीं से समर्पित हो गया था। इसके बाद वे पुष्कर ,अजमेर,चंडीगढ़ में भी आध्यात्म केंद्रों में रहकर कार्य किया। शहडोल के अमलाई के समीप भी वे कुछ वर्षों तक वे रहे। कालांतर में उनका अंबिकापुर आना हुआ। यहां से लगभग 30 किलोमीटर दूर ग्राम बांटीडाँड़ में उन्होंने रहना शुरू किया। अंबिकापुर - रामानुजगंज राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम बरियों से धौरपुर जाने वाले मार्ग पर ग्राम भेलाई खुर्द से बांटीडाँड़ जाने का रास्ता है। इस जगह को सेवा कार्य के लिए चयनित करने के पीछे रामानंद सरस्वती कहते हैं कि - स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि पीड़ित मानवता की सेवा के लिए आगे आना चाहिए। सुविधाओं से दूर अभावों के बीच रहने वाले लोगों के जीवन मे खुशियां लाने का प्रयास करना चाहिए। इसलिए वे भी इसी क्षेत्र में रहकर सेवा कार्य करने का प्रयास कर रहे हैं। जंगल,नदी के किनारे शांत परिवेश एक साधक के लिए सबसे उपयुक्त होता है
जनजातीय क्षेत्र में सामाजिक चेतना जागृत करने में लगे हैं बिगना बाबा
उत्तर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के शंकरगढ विकासखण्ड का एक छोटा सा गांव उदरसई है। इसी गांव के एक युवा आध्यात्मिक चेतना जागृत करने के कार्य मे वर्षों से लगे हुए हैं। क्षेत्र में बिगना बाबा के नाम से चर्चित बिगना बाबा का कार्यक्षेत्र बलरामपुर और जशपुर जिला है। इनके नेतृत्व में गांव-गांव में छोटे-बड़े दर्जनों धाम संचालित है। इनके माध्यम से जनजातीय समाज को धर्म,सभ्यता,संस्कृति, परंपरा की रक्षा के साथ शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। गांव-गांव में रामकथा के प्रचार-प्रसार के साथ भजन-कीर्तन ,पूजा-अर्चना से धार्मिक वातावरण बना रहे हैं। धर्म जागरण अभियान से जुड़े बिगना बाबा को भी श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए अयोध्याधाम में बुलाया गया है। यहां जाने की तैयारी में वे लगे हुए हैं। इन्होंने अपना जीवन सामाजिक कल्याण के लिए समर्पित कर दिया है। छत्तीसगढ़ में निकाली गई संतों की पदयात्रा में भी इन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था