अंबिकापुर में सफाई पर जंग, नगर निगम पर ₹ 2 करोड़ 80 लाख बकाया, ठेकेदारों के बिल से काटे ₹ 20.57 लाख
अंबिकापुर नगर निगम ने 24 वार्डों और रिंग रोड की सफाई का काम संभाल रहे ठेकेदारों के बिलों से ₹20.57 लाख की कटौती की है। आयुक्त डीएन कश्यप ने सफाई में ल...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 13 Aug 2026 04:47:41 PM (IST)Updated Date: Thu, 13 Aug 2026 04:47:41 PM (IST)
नगर निगम अंबिकापुरHighLights
- अंबिकापुर निगम ने ठेकेदारों के बिल से कटे 20.57 लाख।
- ठेकेदारों का 2.80 करोड़ बकाया, सुधार न होने पर चेतावनी।
- भुगतान रुकने से 24 वार्डों में सफाई व्यवस्था पर संकट।
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर: नगर निगम अंबिकापुर एक तरफ सफाई ठेकेदारों को करोड़ों का भुगतान नहीं कर रहा, तो दूसरी तरफ उसी बकाया बिल से कटौती भी कर रहा है। नगर निगम क्षेत्र के 48 वार्डों में से 24 वार्ड और रिंग रोड की सफाई व्यवस्था ठेके पर है। ठेकेदारों का लगभग दो करोड़ 80 लाख रुपये का भुगतान महीनों से बकाया है। इसके बावजूद निगम प्रशासन ने सफाई में लापरवाही का आरोप लगाकर दो ठेका समूहों के बिल से 20 लाख 57 हजार 566 रुपये की कटौती करने का निर्देश जारी कर दिया है।
निगम आयुक्त डीएन कश्यप की ओर से जारी आदेश के अनुसार समूह क्रमांक एक के आठ वार्ड, समूह क्रमांक दो के आठ वार्ड, समूह क्रमांक तीन के आठ वार्ड और रिंग रोड की मैनुअल सफाई का काम ठेके पर दिया गया है। आरोप है कि ठेकेदार अनुबंध की शर्तों के अनुसार निर्धारित संख्या में श्रमिक और कचरा उठाव के लिए वाहन नहीं लगा रहे। इससे शहर में सफाई व्यवस्था सुचारू नहीं हो पा रही।
पूर्व में कई बार मौखिक और लिखित नोटिस दिए जाने के बाद भी सुधार नहीं हुआ।इसी के चलते निगम ने मई 2026, जून 2026 और जुलाई 2026 के बिलों से कटौती की है। समूह एक और तीन के ठेकेदार से 10,20,250 रुपये तथा समूह दो और रिंग रोड के ठेकेदार से 10,37,316 रुपये कुल 20,57,566 रुपये कटौती करने का आदेश जारी किया गया है।
आयुक्त डीएन कश्यप ने निर्देश दिए हैं कि ठेकेदार अनुबंध के अनुसार श्रमिक और वाहन लगाकर सफाई व कचरा उठाव सुनिश्चित करें।उन्होंने कहा कि यदि सफाई कार्य में सुधार नहीं हुआ तो आगामी बिलों से पुनः कटौती की जाएगी और ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
उधर ठेकेदारों का कहना है कि निगम उनके दो करोड़ 80 लाख रुपये का भुगतान पहले से रोके बैठा है। ऐसे में नई गाड़ियां और अतिरिक्त मजदूर लगाना संभव नहीं हो पा रहा। उन्हें भी कर्मचारियों को भुगतान करना पड़ता है। संसाधनों की उपलब्धता भुगतान पर निर्भर होती है जब उन्हें भुगतान ही नहीं मिलेगा तो पूरी क्षमता के साथ कार्य करा पाना भी आसान नहीं होता।
भुगतान नहीं और ऊपर से कटौती से सफाई व्यवस्था और चरमरा सकती है।आरोप है कि नगर निगम द्वारा ट्रैक्टर का एक करोड़ का सालाना टेंडर जारी किया जाता है लेकिन ज्यादा ट्रिप खर्चा बताकर लगभग दोगुना बिल का भुगतान किया जाता है जबकि निगम के पास भी कुछ ट्रेक्टर हैं।
इतना भुगतान है बकाया
- रिंगरोड की सफाई व्यवस्था का नौ माह का 51 लाख रुपये।
- समूह क्रमांक दो का सात माह का 45 लाख रुपये।
- समूह क्रमांक एक का 12 महीने का 96 लाख रुपये
- समूह क्रमांक तीन के 16 माह का 88 लाख रुपये का भुगतान बचा है।
- (प्रत्येक समूह में आठ- आठ वार्ड है)